Dehradun, 24 September 2026। टिहरी झील और इसके आसपास अब बेतरतीब निर्माण और अनियोजित विकास पर रोक लगाने की तैयारी है। झील क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने के लिए करीब आठ हजार हेक्टेयर क्षेत्र का समग्र मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने गुरुवार को सचिवालय में पर्यटन विभाग की बैठक में अधिकारियों को इस दिशा में विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
मास्टर प्लान में सरकारी भूमि के साथ निजी भूमि को भी शामिल किया जाएगा। क्षेत्र को अलग-अलग जोन में बांटकर यह तय किया जाएगा कि किस स्थान पर पर्यटन, निर्माण, पर्यावरण संरक्षण और अन्य गतिविधियां किस तरह संचालित होंगी। इससे झील क्षेत्र में भविष्य के विकास का स्वरूप पहले से निर्धारित किया जा सकेगा और अनियोजित निर्माण को नियंत्रित किया जा सकेगा।
मुख्य सचिव ने कहा कि योजना तैयार करते समय स्थानीय लोगों और सभी संबंधित पक्षों की राय ली जाए। क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और स्थानीय जरूरतों के साथ पर्यटन की संभावनाओं का भी ध्यान रखा जाए। तकनीकी विशेषज्ञता के लिए स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए), नई दिल्ली और भोपाल से सहयोग लेने की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने टिहरी झील के विकास की समग्र कार्ययोजना और प्रस्तावित गतिविधियों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण तैयार करने को कहा, जिसे प्रधानमंत्री के समक्ष रखा जा सके। अगली बैठक में टीएचडीसी के अधिकारियों को भी बुलाया जाएगा।
बैठक में सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल, एपीसीसीएफ डॉ. विवेक पाण्डेय, सुरेन्द्र मेहरा, सीसीएफ प्रसन्ना कुमार पात्रो, अपर सचिव विनीत कुमार, हिमांशु खुराना, अभिषेक रोहिला और जिलाधिकारी टिहरी नितिका खण्डेलवाल उपस्थित रहीं।
एक-दो दिन रोकने की तैयारी
सरकार पर्यटकों को केवल झील के आसपास कुछ घंटे नहीं, बल्कि एक-दो दिन या उससे अधिक समय तक रोकने की योजना बना रही है। इसके लिए नए ट्रैकिंग रूट और ट्रेल विकसित किए जाएंगे। आसपास के गांवों को विलेज और कल्चरल विजिट से जोड़कर स्थानीय संस्कृति, खान-पान और ग्रामीण जीवन को पर्यटन से जोड़ा जाएगा। इससे ग्रामीणों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने की योजना है।
‘वन स्टेट, वन ग्लोबल डेस्टिनेशन’
टिहरी झील को ‘वन स्टेट, वन ग्लोबल डेस्टिनेशन’ की अवधारणा के तहत विकसित किया जाएगा। पूरे लेक एरिया में प्रमुख आकर्षण केंद्र यानी मैगनेट एरिया बनाए जाएंगे। पर्यटन विकास फेजवाइज होगा। वाटर स्पोर्ट्स के साथ एडवेंचर, ट्रैकिंग, नेचर, कल्चर और विलेज टूरिज्म को एक साथ विकसित करने पर जोर रहेगा।
कम जलस्तर में भी जारी रहेंगी गतिविधियां
अप्रैल से जून के बीच झील का जलस्तर कम होने पर भी पर्यटन गतिविधियां प्रभावित न हों, इसके लिए अलग कार्ययोजना बनेगी। मौसम और जलस्तर को ध्यान में रखते हुए पूरे वर्ष का गतिविधि कैलेंडर तैयार किया जाएगा।




