Dehradun, 05 October 2026। उत्तराखंड के पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सरकार बर्थ वेटिंग होम की व्यवस्था कर रही है। इसके तहत प्रसव की संभावित तिथि से पहले महिलाओं को स्वास्थ्य केंद्रों के नजदीक ठहरने की सुविधा मिलेगी। आपात स्थिति में गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने के लिए हेली एंबुलेंस की मदद भी ली जा रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को खटीमा के आंगनबाड़ी केंद्र गोसीकुआ भुड़ाई में आयोजित ‘आंगन मिलन’ कार्यक्रम में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पहाड़ के दुर्गम इलाकों में गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाना बड़ी चुनौती रहती है। विशेषकर सड़क और परिवहन सुविधाओं की कमी वाले क्षेत्रों में प्रसव के दौरान जोखिम बढ़ जाता है। बर्थ वेटिंग होम की व्यवस्था से ऐसी महिलाओं को समय रहते स्वास्थ्य सुविधाओं के करीब लाया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने तथा महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के माध्यम से गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने गर्भवती महिलाओं की गोदभराई की रस्म निभाई। उन्होंने 10 महिलाओं को पौष्टिक आहार किट और 10 लाभार्थियों को महालक्ष्मी किट वितरित की। इसके अलावा पांच बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार कराया। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान देने वाली आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं को सम्मानित भी किया।
धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, मुख्यमंत्री महिला पोषण योजना और महालक्ष्मी किट जैसी योजनाओं से महिलाओं को लाभान्वित किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश का कोई भी बच्चा कुपोषण का शिकार न हो।
उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों की भूमिका केवल पोषण सामग्री वितरित करने तक सीमित नहीं है। ये केंद्र बच्चों के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास की आधारशिला तैयार करते हैं। सरकार आंगनबाड़ी सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।




