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Himalaya Ki Awaj > Blog > देश-विदेश > बैटलफील्‍ड टूरिज्‍म : गुंजी से गलवान तक महसूस कीजिए ‘ रणभूमि ’ का रोमांच
देश-विदेश

बैटलफील्‍ड टूरिज्‍म : गुंजी से गलवान तक महसूस कीजिए ‘ रणभूमि ’ का रोमांच

Web Editor
Last updated: 2025/07/26 at 8:00 AM
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‘ रणभूमि दर्शन’ योजना के तहत सैलानी कर सकेंगे बार्डर एरिया की सैर

योजना में उत्‍तराखंंड के भी आठ स्‍थानों का चयन

देश भर में आठ राज्‍यों के 77 स्‍थान किए गए हैं चयनित, पढिए सूची

देेहरादून : समुद्र तल से करीब 11000 फीट की ऊंचाई पर पसरे बर्फीले बियाबान में अडिग खड़े धूसर पहाडों का सौंदर्य सम्‍मोहित करने वाला है। आसपास वनस्‍पति ना के बराबर है और सामने नजर आ रही बर्फ की चोटियां चांदी-सी चमक रही हैं। रोमांच का अहसास कराता यह वीराना कब आपके सब्र और साहस, यहां तक कि कभी-कभी किस्‍मत की भी परीक्षा ले ले, कह नहीं सकते। इसी वीराने में कदम-कदम पर बिखरी हुई हैं हमारे रणबांकुरों के शौर्य, संकल्‍प और राष्ट्रभक्ति की गाथाएं।

Contents
‘ रणभूमि दर्शन’ योजना के तहत सैलानी कर सकेंगे बार्डर एरिया की सैरयोजना में उत्‍तराखंंड के भी आठ स्‍थानों का चयनदेश भर में आठ राज्‍यों के 77 स्‍थान किए गए हैं चयनित, पढिए सूची

यह है भारत-चीन सीमा से सटी उत्‍तरकाशी जिले की नेलांग घाटी। अब आप भी बैटलफील्‍ड टूरिज्‍म के जरिये इस रणभूमि में खुद को रोमांचित महसूस कर सकते हैं। इस अनूठी योजना का नाम है ‘ रणभूमि दर्शन’। योजना के तहत केंद्र सरकार ने उत्‍तराखंड समेत आठ राज्‍यों में 77 ‘शौर्य स्‍थलों’ का चयन किया है। इस योजना में सेना भी सहयोग कर रही है। जल्‍द ही सैलानी उत्‍तराखंड में गुंजी से लेकर लद्दाख में गलवान घाटी जैसे दुर्गम क्षेत्र में आने वाले बार्डर एरिया की सैर कर सकेंगे। उम्‍मीद की जा रही है कि रणभूमि दर्शन योजना की शुरुआत सितंबर तक सिक्किम से हो जाएगी। इन दिनों वहां इसकी तैयारी चल रही हैं।

देश की सैन्य विरासत से आम आदमी को रू-ब-रू कराने के लिए पहले चरण में सिक्किम में डोकलाम और चोला को खोला जा रहा है। फिलहाल पार्किंग, शौचालय और प्रतीक्षा कक्ष का कार्य अंतिम चरण में है। बताया जा रहा है कि शुरुआत में दोनों जगह 25 से 30 वाहनों के जाने की अनुमति होगी, बाद में इसे बढाकर 50 वाहन तक किया जा सकता है। योजना में उत्‍तराखंड के आठ स्‍थानों को शामिल किया गया है।

 

77 शौर्य गंतव्य स्थलों का राज्यवार विवरण

उत्‍तराखंड : लिपुलेख दर्रा, पिथौरागढ़, हर्षिल सेक्टर, माना सेक्टर, मलारी सेक्टर, कुमाऊँ क्षेत्र, धारचूला, गुंजी

जम्‍मू- कश्‍मीर : गुरेज़ सेक्टर, बंगस घाटी, अरु घाटी, युसमर्ग घाटी, वार्मन घाटी, चंडीग्राम, केरेन, माचिल, तीतवाल,  बारामूला, उरी

लद्दाख : गलवान घाटी, कारगिल, सियाचिन बेस कैंप, काराकोरम दर्रा, पैंगोंग टीएसओ, डेमचोक, पदुम घाटी, हान्ले, चुशूल, हुंडर, तयाक्षी, तुरतुक, टास्किंग, पनामिक

अरुणाचल प्रदेश : तवांग, वालोंग, दिरांग, बम ला, सुंगेत्सर, ज़ेमिथांग, गोरसम, लुम्पो, बोमडिला, लोहित, कामेंग क्षेत्र, बिशुम घाटी, दिबांग क्षेत्र, अनिनी, मेनचुका क्षेत्र, सियांग क्षेत्र, यिंगकिओंग,बीच बढ़िया तालमेल, ऊपरी सुबनसिरी घाटी, त्सारी चू घाटी, टूटिंग घाटी

सिक्किम : डोकलाम, गुरुडोंगमार, थांगू क्षेत्र, लाचुंग क्षेत्र, गेजिंग, युकसोम, पूर्वी सिक्किम क्षेत्र

हिमाचल प्रदेश : स्पीति घाटी, किन्नौर घाटी, कल्पा घाटी, सांगला घाटी

राजस्थान :  लोंगेवाला, तनोट,रामगढ़, सुंदरा, मुनाबाओ, गदरा रोड, भाकासर

गुजरात :  कोटेश्वर, सुइगाम रैन रीगॉन, कच्छ क्षेत्र, लखपत, भुज

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Web Editor July 26, 2025
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साथियों, ये है हिमालय की आवाज. आप सोच रहे होंगे कि इतने पोर्टल के बीच एक और पोर्टल. इसमें क्या अलग है. यूं तो इसमें भी खबर ही होंगी, लेकिन साथ ही होगी हिमालय की आवाज यानी अपनी माटी, अपने गांव गली और चौक की बात. जल-जंगल और जमीन की बात भी. पहाड़ के विकास के लिए हम दमदार आवाज बनेंगे. आप सभी शुभचिंतकों के सहयोग का आकांक्षी. : किरण शर्मा, संस्‍थापक

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