By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
  • उत्तराखंड
  • करियर
  • राजनीती
  • पर्यटन
  • क्राइम
  • देश-विदेश
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्पोर्ट्स
  • स्वास्थ्य
  • वीडियो न्यूज़
Search
  • Advertise
© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs
Reading: गढ़वाल में बढ़ते वन्यजीव हमले से दहशत, पाँच की मौत और 37 से अधिक घायल
Share
Notification Show More
Latest News
देहरादून में पक्षियों की दुनिया से रूबरू हुए छात्र, फोटोग्राफी की बारीकियां सीखीं ‘बर्ड्स ऑफ उत्तराखंड’ प्रदर्शनी और कार्यशाला में वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर राजू पुशोला ने साझा किए अनुभव
उत्तराखंड
एलपीजी सिलेंडर 29 रुपये महंगा
देश-विदेश
हेलीकॉप्टर से भी शुरू हुई बबीता की तलाश, 150 से अधिक जवान छान रहे चप्पा-चप्पा
उत्तराखंड
कैप्टन बनने से दो दिन पहले देश पर न्योछावर हुआ अल्मोड़ा का जांबाज 
उत्तराखंड
न्याय में देरी से डगमगाता है जनता का विश्वास: धामी
उत्तराखंड
Aa
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
Aa
  • पर्यटन
  • राजनीती
Search
  • उत्तराखंड
  • करियर
  • राजनीती
  • पर्यटन
Follow US
  • Advertise
© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs
Himalaya Ki Awaj > Blog > उत्तराखंड > गढ़वाल में बढ़ते वन्यजीव हमले से दहशत, पाँच की मौत और 37 से अधिक घायल
उत्तराखंड

गढ़वाल में बढ़ते वन्यजीव हमले से दहशत, पाँच की मौत और 37 से अधिक घायल

Web Editor
Last updated: 2025/11/22 at 4:47 AM
Web Editor
Share
3 Min Read
SHARE

Garhwal Wildlife Attacks: Leopard and Bear Kill Five, Leave Over 37 Injured in 2025

Contents
गुलदार का बढ़ता आतंकभालू के हमले तेज, थलीसैंण रेंज सबसे प्रभावितग्रामीणों में आक्रोश, स्थायी समाधान की मांगवन विभाग की प्रतिक्रियाताज़ा हमले: दो महिलाएं और एक युवक घायल

पौड़ी, 22 नवंबर 2025 : ढ़वाल क्षेत्र में गुलदार और भालू के बढ़ते हमलों ने हालात भयावह बना दिए हैं। स्थिति यह है कि शाम होते ही गांवों में लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं। आंकड़े बता रहे हैं कि मानव-वन्यजीव संघर्ष गंभीर रूप ले चुका है। वर्ष 2025 में अब तक गुलदार और भालू के हमलों में 5 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 37 से अधिक लोग घायल हुए हैं।

गुलदार का बढ़ता आतंक

गढ़वाल वन प्रभाग में अकेले गुलदार के हमलों में 4 लोगों की जान गई और 24 लोग घायल हुए हैं।

  • पौड़ी नागदेव व दमदेवल रेंज में गुलदार सबसे अधिक सक्रिय रहा है। इन दोनों रेंज में गुलदार एक-एक व्यक्ति की जान ले चुका है।
  • पोखड़ा रेंज में भी इस वर्ष दो लोगों की मौत गुलदार के हमलों में हुई है।
    नागदेव और दमदेवल रेंज को ही सबसे अधिक घायल भी मिले हैं।

भालू के हमले तेज, थलीसैंण रेंज सबसे प्रभावित

इस वर्ष भालू के हमलों के 13 मामले दर्ज हुए हैं।

  • थलीसैंण रेंज सबसे अधिक प्रभावित है, जहां भालू ने एक व्यक्ति की जान ली और 12 लोगों को घायल किया है।

ग्रामीणों में आक्रोश, स्थायी समाधान की मांग

लगातार बढ़ते हमलों को लेकर ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों में भारी नाराज़गी है। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग घटना के बाद कुछ दिनों तक गश्त तो बढ़ाता है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे।

सामाजिक कार्यकर्ता विनोद दनोशी और नमन चंदोला ने कहा कि “पहाड़ों में रहना अब जोखिमपूर्ण हो गया है। हर दिन नए हमले ग्रामीणों को दहशत में जीने पर मजबूर कर रहे हैं।”
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए तो ग्रामीण बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

वन विभाग की प्रतिक्रिया

प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) अभिमन्यु सिंह ने कहा कि गुलदार प्रभावित क्षेत्रों में गश्त बढ़ाई गई है।
“ग्रामीणों को सावधानी बरतने के लिए लगातार जागरूक किया जा रहा है,” — डीएफओ।

ताज़ा हमले: दो महिलाएं और एक युवक घायल

  • पौड़ी: गुरुवार को एक महिला की जान लेने के अगले ही दिन डोभाल ढांडरी गांव की 62 वर्षीय भगवान देवी पर गुलदार ने हमला कर दिया। महिला के गले पर गहरे घाव हैं। उनका जिला अस्पताल में उपचार चल रहा है। वन विभाग ने नियम अनुसार मुआवज़ा देने की बात कही है।
  • पिथौरागढ़ (धारचूला): जयकैट गांव में शुक्रवार सुबह 36 वर्षीय नरेंद्र सिंह पर भालू ने हमला कर दिया। नरेंद्र ने साहस दिखाते हुए मुकाबला किया और शोर मचाया, जिससे ग्रामीण मदद को पहुंचे। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

 

You Might Also Like

देहरादून में पक्षियों की दुनिया से रूबरू हुए छात्र, फोटोग्राफी की बारीकियां सीखीं ‘बर्ड्स ऑफ उत्तराखंड’ प्रदर्शनी और कार्यशाला में वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर राजू पुशोला ने साझा किए अनुभव

हेलीकॉप्टर से भी शुरू हुई बबीता की तलाश, 150 से अधिक जवान छान रहे चप्पा-चप्पा

कैप्टन बनने से दो दिन पहले देश पर न्योछावर हुआ अल्मोड़ा का जांबाज 

न्याय में देरी से डगमगाता है जनता का विश्वास: धामी

अवैध निर्माणों पर एमडीडीए की बड़ी कार्रवाई, दो भवन सील

TAGGED: and Thalisain ranges remain the most affected, Garhwal region faces rising wildlife attacks as leopards and bears claim five lives and injure more than 37 people in 2025. Pauri, Nagdev, Pokhra, prompting locals to demand permanent safety measures.
Web Editor November 22, 2025
Share this Article
Facebook Twitter Copy Link Print
Share
Previous Article उत्तराखंड में नहीं बढ़ेगी वाहन फिटनेस फीस
Next Article Dreamers Edu Hub की उपलब्धि: एक ही SSB बैच के चार छात्रों का चयन
Leave a comment Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

https://himalayakiawaj.com/wp-content/uploads/2026/02/WhatsApp-Video-2025-04-22-at-7.39.16-PM-1.mp4
https://himalayakiawaj.com/wp-content/uploads/2026/02/WhatsApp-Video-2025-04-22-at-7.39.16-PM.mp4

Stay Connected

100 Followers Like
100 Followers Follow
100 Followers Follow
100 Subscribers Subscribe
4.4k Followers Follow
- Advertisement -
Ad imageAd image

Latest News

देहरादून में पक्षियों की दुनिया से रूबरू हुए छात्र, फोटोग्राफी की बारीकियां सीखीं ‘बर्ड्स ऑफ उत्तराखंड’ प्रदर्शनी और कार्यशाला में वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर राजू पुशोला ने साझा किए अनुभव
उत्तराखंड June 9, 2026
एलपीजी सिलेंडर 29 रुपये महंगा
देश-विदेश June 7, 2026
हेलीकॉप्टर से भी शुरू हुई बबीता की तलाश, 150 से अधिक जवान छान रहे चप्पा-चप्पा
उत्तराखंड June 7, 2026
कैप्टन बनने से दो दिन पहले देश पर न्योछावर हुआ अल्मोड़ा का जांबाज 
उत्तराखंड June 7, 2026

Recent Posts

  • देहरादून में पक्षियों की दुनिया से रूबरू हुए छात्र, फोटोग्राफी की बारीकियां सीखीं ‘बर्ड्स ऑफ उत्तराखंड’ प्रदर्शनी और कार्यशाला में वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर राजू पुशोला ने साझा किए अनुभव
  • एलपीजी सिलेंडर 29 रुपये महंगा
  • हेलीकॉप्टर से भी शुरू हुई बबीता की तलाश, 150 से अधिक जवान छान रहे चप्पा-चप्पा
  • कैप्टन बनने से दो दिन पहले देश पर न्योछावर हुआ अल्मोड़ा का जांबाज 
  • न्याय में देरी से डगमगाता है जनता का विश्वास: धामी

साथियों, ये है हिमालय की आवाज. आप सोच रहे होंगे कि इतने पोर्टल के बीच एक और पोर्टल. इसमें क्या अलग है. यूं तो इसमें भी खबर ही होंगी, लेकिन साथ ही होगी हिमालय की आवाज यानी अपनी माटी, अपने गांव गली और चौक की बात. जल-जंगल और जमीन की बात भी. पहाड़ के विकास के लिए हम दमदार आवाज बनेंगे. आप सभी शुभचिंतकों के सहयोग का आकांक्षी. : किरण शर्मा, संस्‍थापक

Most Viewed Posts

  • मक्‍की की वजह से पर्यटन के नक्‍शे पर आया यह गांव (6,243)
  • राज्य में 12 पी माइनस थ्री पोलिंग स्टेशन बनाए गए (6,106)
  • टिहरी राजपरिवार के पास 200 करोड से अधिक की संपत्ति (4,605)
  • कम मतदान प्रतिशत वाले बूथों पर जनजागरूकता में जुटा चुनाव आयोग (4,512)
  • प्रधानमंत्री माेदी और गृह मंत्री शाह जल्‍द आएंगे उत्‍तराखंड (4,367)
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
Follow US

© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs

Removed from reading list

Undo
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?