Gopeswar,18 May 2026: रुद्रनाथ मंदिर के कपाट सोमवार को पूर्ण वैदिक रीति-रिवाज और धार्मिक परंपराओं के साथ श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। कपाट खुलते ही हिमालय की शांत वादियां “हर-हर महादेव” और “जय बाबा रुद्रनाथ” के जयघोष से गूंज उठीं। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, साधु-संत और स्थानीय लोग मौजूद रहे।
मंदिर के पुजारी हरीश भट्ट ने विशेष पूजा-अर्चना और मंत्रोच्चारण के बीच भगवान रुद्रनाथ के कपाट खोले। धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान पूरा वातावरण शिवमय बना रहा। कपाट खुलने के साथ ही छह माह तक चलने वाली पूजा-अर्चना और धार्मिक गतिविधियों का भी शुभारंभ हो गया है।
पंचकेदारों में चतुर्थ केदार के रूप में प्रतिष्ठित रुद्रनाथ धाम का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यहां भगवान शिव के ‘एकानन स्वरूप’ यानी मुख रूप की पूजा की जाती है। समुद्र तल से ऊंचाई पर हिमालय की दुर्गम पर्वत श्रृंखलाओं के बीच स्थित यह धाम अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा, प्राकृतिक सौंदर्य और अलौकिक वातावरण के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध है।
हर वर्ष हजारों श्रद्धालु कठिन पैदल यात्रा तय कर बाबा रुद्रनाथ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। दुर्गम पहाड़ी रास्तों से होकर गुजरने वाली यह यात्रा श्रद्धालुओं को आस्था, साहस और प्रकृति के अद्भुत संगम का अनुभव कराती है। कपाट खुलने के साथ ही इस वर्ष की रुद्रनाथ यात्रा भी विधिवत शुरू हो गई है।
प्रशासन और यात्रा प्रबंधन से जुड़े विभागों ने यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। यात्रा मार्ग और प्रमुख पड़ावों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। साथ ही स्वास्थ्य, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं की भी व्यवस्था की गई है।
हिमालयी वादियों में गूंजे शिवभक्ति के स्वर, श्रद्धालुओं के लिए खुले चतुर्थ केदार के कपाट
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