Dehradun, 19 june 2026। उत्तराखंड ने शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए खुद को देश के सबसे साक्षर राज्यों की श्रेणी में शामिल कर लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश को पूर्ण साक्षर राज्य घोषित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। साक्षरता दर 98 प्रतिशत से अधिक पहुंचने के बाद राज्य सरकार ने यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
इस उपलब्धि के साथ उत्तराखंड देश का दूसरा ऐसा राज्य बन गया है जिसने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के मानकों के अनुरूप पूर्ण साक्षरता का लक्ष्य हासिल किया है। सरकार का कहना है कि यह सफलता केवल सरकारी प्रयासों का परिणाम नहीं, बल्कि शिक्षकों, स्वयंसेवी संगठनों, स्थानीय समुदायों और आम नागरिकों की सहभागिता का भी प्रतिफल है।
महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी ने बताया कि राज्य ने साक्षरता से जुड़े सभी निर्धारित मानकों को पूरा कर लिया है। इसके तहत 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के अधिकांश नागरिक पढ़ने, लिखने और सामान्य गणना करने में सक्षम हैं। साथ ही डिजिटल और वित्तीय साक्षरता को भी बढ़ावा दिया गया है, जिससे लोग आधुनिक जीवन की आवश्यकताओं के अनुरूप खुद को तैयार कर सकें।
राज्य सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में स्कूल शिक्षा को मजबूत बनाने, ड्रॉपआउट दर कम करने, वयस्क शिक्षा कार्यक्रमों को गति देने और दूरस्थ क्षेत्रों तक शिक्षा पहुंचाने के लिए विशेष अभियान चलाए। पर्वतीय क्षेत्रों में भी शिक्षा की पहुंच बढ़ाने और तकनीक आधारित शिक्षण व्यवस्था को प्रोत्साहित करने का सकारात्मक परिणाम अब सामने आया है।
सरकार का मानना है कि पूर्ण साक्षरता केवल अक्षर ज्ञान तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और डिजिटल रूप से सशक्त बनाना भी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत शिक्षा को कौशल विकास, रोजगार और तकनीकी दक्षता से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि राज्य के मानव संसाधन विकास, रोजगार क्षमता और सामाजिक प्रगति को नई गति देगी। आने वाले वर्षों में उत्तराखंड शिक्षा की गुणवत्ता और कौशल विकास के क्षेत्र में भी नई पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
शिक्षा में उत्तराखंड की बड़ी छलांग, पूर्ण साक्षर राज्य घोषित साक्षरता दर 98 प्रतिशत
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