Dehradun, 05 August 2026। उत्तराखंड के दो प्रमुख पर्यटन शहर मसूरी और नैनीताल में जल्द ही बिजली की ओवरहेड लाइनों की जगह अंडरग्राउंड विद्युत लाइनें बिछाने की दिशा में कदम बढ़ सकते हैं। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने ऊर्जा विभाग को दोनों शहरों के लिए अंडरग्राउंड विद्युत लाइन परियोजना का विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य बिजली आपूर्ति को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने के साथ-साथ पर्यटन शहरों की सुंदरता को भी बेहतर करना है।
बुधवार को सचिवालय में बाह्य सहायतित परियोजनाओं (Externally Aided Projects) की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखंड में आधारभूत ढांचे को मजबूत करने वाली परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने ऊर्जा विभाग को मसूरी और नैनीताल के लिए अंडरग्राउंड बिजली लाइन परियोजना का प्रस्ताव तैयार कर जल्द आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।
वर्तमान में दोनों पर्यटन नगरों में अधिकांश बिजली लाइनें खंभों के माध्यम से ऊपर से गुजरती हैं। मानसून के दौरान तेज बारिश, आंधी, भूस्खलन और पेड़ों के गिरने से बिजली आपूर्ति अक्सर बाधित हो जाती है। कई बार तार टूटने से दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। अंडरग्राउंड केबल बिछने के बाद ऐसी समस्याओं में काफी कमी आने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों के अनुसार अंडरग्राउंड विद्युत प्रणाली का सबसे बड़ा लाभ यह है कि बिजली की लाइनें मौसम के प्रभाव से काफी हद तक सुरक्षित रहती हैं। तेज हवा, बर्फबारी, पेड़ों की टहनियां या भूस्खलन जैसी घटनाओं से बिजली व्यवस्था कम प्रभावित होती है। इससे बार-बार होने वाली बिजली कटौती घटेगी और मरम्मत पर होने वाला खर्च भी कम होगा। साथ ही सड़कों और बाजारों में बिजली के तारों का जाल खत्म होने से शहरों का सौंदर्य भी निखरेगा, जो पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
बैठक में मुख्य सचिव ने यह भी निर्देश दिए कि जिन परियोजनाओं को विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक या अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से वित्तीय सहायता मिल रही है, उनकी नियमित निगरानी की जाए और समय पर पूरा करने के लिए जरूरत के अनुसार मैनपावर और मशीनरी बढ़ाई जाए। उन्होंने कहा कि पूर्ण हो चुकी परियोजनाओं की क्लोजर रिपोर्ट समय पर संबंधित एजेंसियों और भारत सरकार को भेजी जाए।
इसके अलावा मुख्य सचिव ने उत्तराखंड इंटीग्रेटेड हॉर्टिकल्चर प्रोजेक्ट में तेजी लाने के लिए डेडिकेटेड प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (पीएमयू) स्थापित करने, तकनीकी शिक्षा संस्थानों की आधारभूत संरचना मजबूत करने, नदी पुनर्जीवन, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ी नई बाह्य सहायतित परियोजनाएं तैयार करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं की गति बढ़ाने के साथ उनकी गुणवत्ता और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।




