Dehradun, 12 August2026। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जल जीवन मिशन का उद्देश्य केवल घरों तक नल पहुंचाना नहीं, बल्कि उन नलों से नियमित और गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश के शेष पात्र परिवारों को तय समयसीमा में नल कनेक्शन उपलब्ध कराने के साथ ही जहां कनेक्शन दिए जा चुके हैं, वहां पानी की उपलब्धता और गुणवत्ता की भी लगातार निगरानी की जाए।
बुधवार को सचिवालय में जल जीवन मिशन की प्रगति की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन और लंबित पेयजल योजनाओं को मिशन मोड में पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पूर्ण हो चुकी योजनाओं का स्थलीय सत्यापन जल्द कराया जाए, ताकि कागजों में योजना पूरी होने और वास्तव में ग्रामीणों को पानी मिलने के बीच कोई अंतर न रहे।
9,796 गांवों में सत्यापन पूरा
बैठक में जलापूर्ति योजनाओं की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति, ग्रामीण परिवारों को नल से जल की उपलब्धता, पेयजल की गुणवत्ता, योजनाओं के सत्यापन तथा संचालन और रखरखाव की स्थिति की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि राज्य के कुल 14,979 गांवों में से 9,796 गांवों में हर नल से जल पहुंचने का सत्यापन पूरा किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने शेष गांवों में सत्यापन की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए।
उन्होंने जिलाधिकारियों को संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर योजनाओं के निर्माण में आ रही तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों का तत्काल समाधान करने को कहा। मुख्यमंत्री ने प्रत्येक जिले में योजनाओं के लिए स्पष्ट लक्ष्य, समयसीमा और जवाबदेही तय करने के निर्देश भी दिए।
15,540 योजनाएं पूरी
समीक्षा में बताया गया कि जल जीवन मिशन के तहत प्रदेश में कुल 16,555 योजनाओं में से 15,540 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं। राज्य की औसत प्रगति 92.46 प्रतिशत है, जबकि 1,015 योजनाएं निर्माणाधीन हैं। ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन उपलब्ध कराने के मामले में कुल 14.48 लाख परिवारों में से 14.20 लाख परिवारों तक नल कनेक्शन पहुंचाया जा चुका है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कनेक्शन देने के बाद योजनाओं का संचालन और रखरखाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसके लिए स्थायी व्यवस्था विकसित की जाए। यदि किसी योजना में अनावश्यक देरी या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित कार्यदायी संस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
पहाड़ में जल स्रोतों के संरक्षण पर जोर
मुख्यमंत्री ने पर्वतीय क्षेत्रों में पेयजल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवीकरण को विशेष प्राथमिकता देने को कहा। उन्होंने वर्षा जल संचयन और जल स्रोतों के पुनर्भरण पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए, ताकि आने वाले वर्षों में पेयजल संकट की आशंका को कम किया जा सके। उन्होंने जिलों में पेयजल से जुड़ी तकनीकी समस्याओं के त्वरित समाधान की प्रभावी व्यवस्था बनाने को भी कहा।
बैठक में अवस्थापना अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष विश्वास डाबर, प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, सचिव पेयजल रणवीर सिंह चौहान, अपर सचिव रोहित मीणा, झरना कमठान सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।




