Dehradun, 19 October 2026 । मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) के संक्रमण से नौ बाघों की मौत के बाद उत्तराखंड में भी वन विभाग सतर्क हो गया है। राज्य के बाघों को इस संक्रामक बीमारी से बचाने के लिए कार्बेट और राजाजी टाइगर रिजर्व समेत सभी संरक्षित क्षेत्रों को अलर्ट किया गया है। साथ ही टाइगर रिजर्व के आसपास स्थित गांवों और कस्बों में पालतू व आवारा कुत्तों का टीकाकरण कराने की तैयारी है। इसके लिए वन विभाग ने पशुपालन विभाग से समन्वय शुरू कर दिया है।
उत्तराखंड की मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक नीना ग्रेवाल के अनुसार, प्रदेश में वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता बरती जा रही है। सभी टाइगर रिजर्व को जरूरी एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। संरक्षित क्षेत्रों के आसपास रहने वाले कुत्तों का वैक्सीनेशन कराने के लिए पशुपालन विभाग को पत्र लिखा गया है।
कान्हा में लगातार हो रही बाघों की मौत
मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस वन्यजीवों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। मुक्की परिक्षेत्र स्थित वन्यजीव उपचार केंद्र में भर्ती एक मादा बाघ शावक की रविवार को मौत हो गई। शुरुआती जानकारी में इसकी वजह सीडीवी संक्रमण बताई गई है। इस घटना के बाद संक्रमण से मरने वाले बाघों की संख्या नौ हो गई है। लगातार सामने आ रहे मामलों ने वन्यजीव संरक्षण से जुड़े अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है।
उत्तराखंड में भी कार्बेट और राजाजी जैसे महत्वपूर्ण बाघ संरक्षण क्षेत्र हैं। ऐसे में वन विभाग संक्रमण की आशंका को देखते हुए पहले से ही बचाव के उपाय करने में जुटा है। खास तौर पर टाइगर रिजर्व से सटे गांवों और कस्बों में कुत्तों के टीकाकरण पर जोर दिया जा रहा है, ताकि संक्रमण के संभावित प्रसार को रोकने में मदद मिल सके।
क्या है कैनाइन डिस्टेंपर वायरस?
कैनाइन डिस्टेंपर एक संक्रामक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से कुत्तों और अन्य मांसाहारी जीवों को प्रभावित करती है। यह संक्रमित जानवरों के संपर्क और उनके शारीरिक स्राव के माध्यम से फैल सकती है। संक्रमण होने पर बुखार, सांस लेने में परेशानी और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। बाघ और गुलदार जैसे वन्यजीव भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।
उत्तराखंड में अब तक संक्रमण से मौत का मामला नहीं
मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक नीना ग्रेवाल ने बताया कि उत्तराखंड में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से अब तक किसी बाघ या गुलदार की मौत का मामला सामने नहीं आया है। इसके बावजूद वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। पशुपालन विभाग को संरक्षित क्षेत्रों से लगे गांवों और कस्बों में पालतू तथा आवारा कुत्तों का टीकाकरण कराने के लिए पत्र भेजा गया है। विभाग का उद्देश्य संक्रमण के संभावित खतरे को कम करना और राज्य के वन्यजीवों को सुरक्षित रखना है।
कोट
राज्य में कैनाइन डिस्टेंपर से किसी बाघ या गुलदार की मौत का अभी तक कोई मामला सामने नहीं आया है। इसके बावजूद सतर्कता बरती जा रही है। पशुपालन विभाग को पत्र लिखकर संरक्षित क्षेत्रों से लगे गांवों और कस्बों में पालतू व आवारा कुत्तों का टीकाकरण कराने को कहा गया है।
— नीना ग्रेवाल, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, उत्तराखंड




