Badrinath, 01 November 2026। हेलीकॉप्टर हादसे में जान गंवाने वाले छह लोगों के पार्थिव शरीरों को बाहर निकालना बचाव दलों के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं रहा। दुर्घटनास्थल तक पहुंचने के लिए दुर्गम पहाड़ियों में घंटों पैदल चढ़ाई करनी पड़ी तो शवों को सड़क तक लाने के लिए जवानों को करीब 12 किलोमीटर का सफर कंधों पर भार उठाकर तय करना पड़ा। घुप्प अंधेरे, उबड़-खाबड़ रास्तों और बेहद कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच सेना, आईटीबीपी, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और प्रशासन की संयुक्त टीमें पूरी रात अभियान में जुटी रहीं। रविवार तड़के पौने पांच बजे अंतिम शव जोशीमठ पहुंचा। इसके साथ ही सभी छह मृतकों के शव बरामद करने का अभियान पूरा हुआ।
जिलाधिकारी गौरव कुमार के अनुसार हादसे का घटनास्थल बेहद दुर्गम और ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्र में स्थित था। यहां सड़क संपर्क नहीं होने के कारण बचाव दलों को पांडुकेश्वर की ओर से पैदल ही पहाड़ की चढ़ाई करनी पड़ी। कठिन रास्तों और रात के अंधेरे ने अभियान की मुश्किलें और बढ़ा दीं। देर शाम टीमें दुर्घटनास्थल तक पहुंचीं और इसके बाद शवों को सुरक्षित बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू की गई।
सबसे कठिन चुनौती शवों को घटनास्थल से सड़क तक पहुंचाने की थी। हवाई मदद और आधुनिक संसाधनों की संभावनाओं के बावजूद भौगोलिक परिस्थितियां ऐसी थीं कि जवानों को शवों को कंधों पर उठाकर करीब 12 किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। पूरी रात चले इस अभियान में एक-एक कर सभी छह शवों को सुरक्षित निकाला गया। रविवार सुबह करीब 4:45 बजे अंतिम शव जोशीमठ पहुंचाया गया।
इसके बाद सभी पार्थिव शरीर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ज्योतिर्मठ लाए गए। यहां आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद एनटीपीसी हेलीपैड से हेलीकॉप्टर के जरिए शवों को एम्स ऋषिकेश भेजा गया। शवों की स्थिति क्षत-विक्षत होने के कारण उनकी पहचान सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। एम्स में मृतकों के डीएनए नमूने एकत्र किए गए हैं। इनका मिलान परिजनों के डीएनए नमूनों से कराया जाएगा। पहचान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पोस्टमार्टम कराकर पार्थिव शरीर परिजनों को सौंपे जाएंगे।
हादसे में छह लोगों की मौत से क्षेत्र में शोक का माहौल है। वहीं, बचाव दलों का पूरी रात चला अभियान हिमालयी क्षेत्रों में आपदा के दौरान राहत और बचाव कार्यों की कठिनाइयों को भी सामने लाता है। सड़क सुविधा से दूर ऊंचे पहाड़ों में 12 किलोमीटर तक शवों को पैदल ढोकर लाना जवानों के धैर्य, साहस और समन्वय की बड़ी परीक्षा साबित हुआ।
घुप्प अंधेरा और उबड़-खाबड़ रास्ते बने चुनौती
दुर्घटनास्थल तक पहुंचने और शवों को बाहर निकालने में रात का अंधेरा सबसे बड़ी बाधा बना। पहाड़ी रास्तों पर फिसलन, ऊंचाई और सीमित आवाजाही के बीच जवानों ने अभियान नहीं रोका। आपसी समन्वय से एक-एक कर छह शवों को करीब 12 किलोमीटर पैदल उठाकर सड़क तक पहुंचाया गया।
एम्स में लिए गए डीएनए नमूने
ऋषिकेश एम्स पहुंचे शव क्षत-विक्षत हालत में हैं। ऐसे में मृतकों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए डीएनए जांच का सहारा लिया जा रहा है। अस्पताल में सभी छह शवों के डीएनए नमूने एकत्र कर लिए गए हैं। इनका मिलान मृतकों के परिजनों के नमूनों से किया जाएगा। पहचान की पुष्टि के बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होगी।




