Dehradun, 01 November 2026। उत्तराखंड में क्षेत्र पंचायतों की आर्थिक और प्रशासनिक मजबूती को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को कई अहम घोषणाएं कीं। लंबे समय से मानदेय और भत्तों में बढ़ोतरी की मांग कर रहे क्षेत्र पंचायत सदस्यों (बीडीसी) को सरकार ने राहत देने का संकेत दिया है। मुख्यमंत्री ने उनके मानदेय और भत्तों में वृद्धि के लिए कार्यवाही करने के साथ क्षेत्र पंचायत निधि को फिर से बहाल करने का ऐलान किया। इसके अलावा ब्लॉक प्रमुखों को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) की ब्लॉक स्तरीय समिति में प्रतिनिधित्व देने की भी घोषणा की गई।
मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित उत्तराखंड प्रमुख संगठन सम्मेलन में धामी ने पंचायत प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि ग्रामीण विकास की योजनाओं को धरातल पर उतारने में ब्लॉक प्रमुखों और क्षेत्र पंचायत सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका है। गांवों की वास्तविक समस्याओं और जरूरतों की जानकारी पंचायत प्रतिनिधियों को सबसे बेहतर होती है। ऐसे में विकास योजनाओं की रूपरेखा तैयार करने से लेकर उनके क्रियान्वयन तक उनकी भागीदारी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि सरकार और जनता के बीच महत्वपूर्ण कड़ी हैं। सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं को गांवों तक पहुंचाने में उनका योगदान अहम है। सरकार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर ग्रामीण विकास को गति देना चाहती है।
धामी ने कहा कि विकसित उत्तराखंड का लक्ष्य गांवों को आत्मनिर्भर बनाए बिना हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए होमस्टे, ग्रामीण पर्यटन, कृषि, बागवानी, पशुपालन और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने प्रदेश में रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि गांवों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने में पंचायत प्रतिनिधियों को सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
स्थानीय निकायों को 721 करोड़ की अतिरिक्त व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने कहा कि छठे राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों के आधार पर स्थानीय निकायों की राज्य के कर राजस्व में हिस्सेदारी 10.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। इसके लिए अनुपूरक बजट में 721 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इससे पंचायतों और स्थानीय निकायों को विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे।




