By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
  • उत्तराखंड
  • करियर
  • राजनीती
  • पर्यटन
  • क्राइम
  • देश-विदेश
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्पोर्ट्स
  • स्वास्थ्य
  • वीडियो न्यूज़
Search
  • Advertise
© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs
Reading: हिमालय की हरियाली में आ रहे बदलाव ने बढ़ाई वैज्ञानिकों की चिंता, उपग्रह अध्ययन से मिले अहम संकेत
Share
Notification Show More
Latest News
दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल के ऋषिकेश तक विस्तार की उम्मीद, सीएम धामी ने पीएम से किया अनुरोध
उत्तराखंड
एमडीडीए का अवैध निर्माणों पर बड़ा एक्शन, डोईवाला और ऋषिकेश में कई भवन सील
उत्तराखंड
देहरादून में निजी स्कूलों पर सख्ती, मनमानी फीस वृद्धि और महंगी किताबों पर लगेगा लगाम
उत्तराखंड
नवरात्र में माँ अंबिका मंदिर राजपुर में गूंजी भक्ति की स्वर लहरियां, जागर संध्या में झूमे श्रद्धालु
उत्तराखंड
कैबिनेट मंत्री भरत चौधरी ने श्री दरबार साहिब में टेका मत्था, श्री महंत से समसामयिक मुद्दों पर हुई चर्चा
उत्तराखंड
Aa
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
Aa
  • पर्यटन
  • राजनीती
Search
  • उत्तराखंड
  • करियर
  • राजनीती
  • पर्यटन
Follow US
  • Advertise
© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs
Himalaya Ki Awaj > Blog > देश-विदेश > हिमालय की हरियाली में आ रहे बदलाव ने बढ़ाई वैज्ञानिकों की चिंता, उपग्रह अध्ययन से मिले अहम संकेत
देश-विदेश

हिमालय की हरियाली में आ रहे बदलाव ने बढ़ाई वैज्ञानिकों की चिंता, उपग्रह अध्ययन से मिले अहम संकेत

Web Editor
Last updated: 2026/02/11 at 4:54 AM
Web Editor
Share
3 Min Read
SHARE

Satellite Study Warns of Changing Himalayan Greening in Uttarakhand

देहरादून, 11 February 2026: उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन का असर अब केवल अनुमान नहीं, बल्कि वैज्ञानिक आंकड़ों में साफ दिखाई देने लगा है। उपग्रह आधारित एक विस्तृत अध्ययन में सामने आया है कि बीते करीब 22 वर्षों में हिमालय की हरियाली के स्वरूप में उल्लेखनीय बदलाव आया है। जंगलों, घास के मैदानों और घाटियों में पेड़-पौधों के रंग, घनत्व और फैलाव में हो रहे ये परिवर्तन हिमालय के नाजुक पर्यावरण संतुलन के लिए गंभीर चेतावनी माने जा रहे हैं।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के स्वायत्त संस्थान आर्यभट्ट अवलोकन विज्ञान अनुसंधान संस्थान (एआरआईईएस), नैनीताल के वैज्ञानिकों ने भारत और विदेश के विशेषज्ञों के सहयोग से वर्ष 2001 से 2022 तक उत्तराखंड की वनस्पति, प्रदूषण और जलवायु प्रभावों का गहन अध्ययन किया। इस शोध में उपग्रह आधारित वैश्विक मंच Google Earth Engine का इस्तेमाल किया गया, जिससे लंबे समय के डाटा का एक साथ विश्लेषण संभव हो पाया।
अध्ययन का नेतृत्व एआरआईईएस के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. उमेश चंद्र दुमका ने किया। उनके अनुसार, एनडीवीआई (नॉर्मलाइज़्ड डिफरेंस वेजिटेशन इंडेक्स) और ईवीआई (एन्हांस्ड वेजिटेशन इंडेक्स) जैसे पैमानों से यह स्पष्ट हुआ है कि मानसून के बाद हरियाली अपने चरम पर होती है, जबकि मानसून से पहले इसमें सबसे अधिक कमी देखी जाती है। यह बदलाव केवल मौसमी नहीं, बल्कि दीर्घकालिक प्रवृत्ति की ओर इशारा करता है।
डॉ. दुमका का कहना है कि जंगलों की कटाई, कृषि भूमि का विस्तार, अवैध कटान, सड़क निर्माण और बढ़ता शहरी-औद्योगिक प्रदूषण इसके प्रमुख कारण हैं। इसके साथ ही तापमान और वर्षा में हो रहे असंतुलन का सीधा असर भी वनस्पति पर पड़ रहा है। पियरसन सहसंबंध जैसी सांख्यिकीय विधियों से यह समझने की कोशिश की गई कि जलवायु कारक किस तरह हरियाली को प्रभावित कर रहे हैं।
वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यदि यह स्थिति बनी रही तो जैव विविधता को नुकसान, जल स्रोतों में कमी और नदियों पर निर्भर आबादी की आजीविका पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। यह शोध अंतरराष्ट्रीय जर्नल Environmental Monitoring and Assessment में प्रकाशित हुआ है। वैज्ञानिकों का मानना है कि उपग्रह विज्ञान भविष्य में एक प्रभावी प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली बन सकता है, जिससे समय रहते संरक्षण और नीतिगत निर्णय लेकर हिमालयी पर्यावरण को बचाया जा सके।

You Might Also Like

पीएनजी उपभोक्ताओं को एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना होगा, केंद्र का बड़ा फैसला

अब गूगल मैप्स पर मिलेगी आधार सेवाओं की पूरी जानकारी, घर बैठे ढूंढ सकेंगे नजदीकी केंद्र

एक अप्रैल  से टोल प्लाजा पर बंद हो सकता है नकद भुगतान 

बाढ़ से पहले ही चेतावनी देगा ‘फ्लड वॉच’ मोबाइल एप

गंगा की स्वच्छता का संकेत बनेंगे कछुए, वैज्ञानिकों ने तय किया नया जैविक मानक

TAGGED: A satellite-based study by ARIES scientists reveals significant changes in Himalayan vegetation in Uttarakhand due to climate change, and water resources., biodiversity, raising concerns over ecology
Web Editor February 11, 2026
Share this Article
Facebook Twitter Copy Link Print
Share
Previous Article इन्दिरेश अस्पताल निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर बना गरीबों के लिए संजीवनी, 5304 मरीजों को मिला इलाज का सहारा
Next Article रोमांच के शौकीनों की नई पहचान जालेख की पहाड़िया
Leave a comment Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

https://himalayakiawaj.com/wp-content/uploads/2026/02/WhatsApp-Video-2025-04-22-at-7.39.16-PM-1.mp4
https://himalayakiawaj.com/wp-content/uploads/2026/02/WhatsApp-Video-2025-04-22-at-7.39.16-PM.mp4

Stay Connected

100 Followers Like
100 Followers Follow
100 Followers Follow
100 Subscribers Subscribe
4.4k Followers Follow
- Advertisement -
Ad imageAd image

Latest News

दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल के ऋषिकेश तक विस्तार की उम्मीद, सीएम धामी ने पीएम से किया अनुरोध
उत्तराखंड March 28, 2026
एमडीडीए का अवैध निर्माणों पर बड़ा एक्शन, डोईवाला और ऋषिकेश में कई भवन सील
उत्तराखंड March 28, 2026
देहरादून में निजी स्कूलों पर सख्ती, मनमानी फीस वृद्धि और महंगी किताबों पर लगेगा लगाम
उत्तराखंड March 27, 2026
नवरात्र में माँ अंबिका मंदिर राजपुर में गूंजी भक्ति की स्वर लहरियां, जागर संध्या में झूमे श्रद्धालु
उत्तराखंड March 27, 2026

Recent Posts

  • दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल के ऋषिकेश तक विस्तार की उम्मीद, सीएम धामी ने पीएम से किया अनुरोध
  • एमडीडीए का अवैध निर्माणों पर बड़ा एक्शन, डोईवाला और ऋषिकेश में कई भवन सील
  • देहरादून में निजी स्कूलों पर सख्ती, मनमानी फीस वृद्धि और महंगी किताबों पर लगेगा लगाम
  • नवरात्र में माँ अंबिका मंदिर राजपुर में गूंजी भक्ति की स्वर लहरियां, जागर संध्या में झूमे श्रद्धालु
  • कैबिनेट मंत्री भरत चौधरी ने श्री दरबार साहिब में टेका मत्था, श्री महंत से समसामयिक मुद्दों पर हुई चर्चा

साथियों, ये है हिमालय की आवाज. आप सोच रहे होंगे कि इतने पोर्टल के बीच एक और पोर्टल. इसमें क्या अलग है. यूं तो इसमें भी खबर ही होंगी, लेकिन साथ ही होगी हिमालय की आवाज यानी अपनी माटी, अपने गांव गली और चौक की बात. जल-जंगल और जमीन की बात भी. पहाड़ के विकास के लिए हम दमदार आवाज बनेंगे. आप सभी शुभचिंतकों के सहयोग का आकांक्षी. : किरण शर्मा, संस्‍थापक

Most Viewed Posts

  • मक्‍की की वजह से पर्यटन के नक्‍शे पर आया यह गांव (6,070)
  • राज्य में 12 पी माइनस थ्री पोलिंग स्टेशन बनाए गए (5,967)
  • टिहरी राजपरिवार के पास 200 करोड से अधिक की संपत्ति (4,466)
  • कम मतदान प्रतिशत वाले बूथों पर जनजागरूकता में जुटा चुनाव आयोग (4,337)
  • प्रधानमंत्री माेदी और गृह मंत्री शाह जल्‍द आएंगे उत्‍तराखंड (4,254)
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
Follow US

© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs

Removed from reading list

Undo
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?