Dehradun, 10 August 2026 । उत्तराखंड में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने की सरकारी मुहिम अब रोजगार और स्वरोजगार से भी जुड़ने लगी है। मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के माध्यम से राज्य के स्थानीय निवासी सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित कर आय के साथ-साथ हरित ऊर्जा के विस्तार में योगदान दे रहे हैं। जून तक योजना के तहत प्रदेश में 1132 सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। इन परियोजनाओं की कुल क्षमता 2,10,420 किलोवाट यानी करीब 210 मेगावाट पहुंच गई है। इनसे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 3500 से अधिक लोगों को रोजगार मिलने का दावा किया गया है।
राज्य सरकार ने योजना के तहत सौर ऊर्जा क्षमता को और विस्तार देने का लक्ष्य तय किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में 250 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता विकसित करने के निर्देश दिए हैं। योजना के अंतर्गत स्थानीय लोग 20, 25, 50, 100 और 200 किलोवाट क्षमता वाले सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित कर सकते हैं। परियोजना संचालकों को एमएसएमई नीति-2023 के तहत विभिन्न सुविधाएं और प्रोत्साहन भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
सरकार के मुताबिक, योजना का उद्देश्य सिर्फ बिजली उत्पादन बढ़ाना नहीं है, बल्कि स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को मजबूत करना भी है। खासतौर पर पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्रों में सौर परियोजनाओं के संचालन से युवाओं को अपने ही क्षेत्र में काम के अवसर मिलने की संभावना बढ़ रही है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ पलायन की समस्या को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि सौर ऊर्जा जैसे नए क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं और उद्यमियों को जोड़कर रोजगार के अतिरिक्त अवसर तैयार किए जा रहे हैं। हरित ऊर्जा के विस्तार के साथ इसका लाभ पर्वतीय क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा।
जिलों में टिहरी ने मारी बाजी
जिलेवार प्रदर्शन में टिहरी गढ़वाल सबसे आगे है। जिले में 369 सौर ऊर्जा संयंत्रों के माध्यम से 69,050 किलोवाट क्षमता विकसित की जा चुकी है। इसके बाद उत्तरकाशी में 227 संयंत्रों से 43,660 किलोवाट और चंपावत में 144 संयंत्रों से 28,200 किलोवाट क्षमता स्थापित हुई है।
हरिद्वार में 86 संयंत्रों से 16,900 किलोवाट, पौड़ी में 88 संयंत्रों से 15,440 किलोवाट और चमोली में 72 संयंत्रों से 11,725 किलोवाट क्षमता विकसित की गई है। वहीं अल्मोड़ा में भी 32 सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित हो चुके हैं। आंकड़े बताते हैं कि राज्य के पर्वतीय जिलों में भी सौर ऊर्जा आधारित स्वरोजगार को लेकर लोगों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।




