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Himalaya Ki Awaj > Blog > उत्तराखंड > शहीद हो गए जांबाज, लेकिन नहीं छोडा मोर्चा
उत्तराखंड

शहीद हो गए जांबाज, लेकिन नहीं छोडा मोर्चा

Web Editor
Last updated: 2024/07/10 at 2:38 AM
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5 Min Read
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देहरादून : जम्मू और कश्मीर में कठुआ जिला मुख्यालय से 150 किलोमीटर दूर बदनोटा गांव के पास जो कुछ हुआ, उसे आतंकवादी कभी भूल नहीं पाएंगे। यहां माछेड़ी-किंडली-मल्हार के पहाड़ी मार्ग पर दोपहर बाद करीब 3.20 पर कायर आतंकवादियों ने घात लगाकर 22वीं गढ़वाल राइफल्स के सैन्य वाहन पर हमला किया, ग्रेनेड फेंका और अंधाधुंध गोलियां बरसा डाली। इस हमले में एक चश्मदीद पूरन चंद (स्थानीय दुकानदार) ने जो हाल बताया, वह आतंकियों के लिए कभी न भूलने वाला मंजर जरूर होगा। बेशक इस हमले में उत्तराखंड के 05 जांबाज जरूर शहीद हो गए और 05 घायल हुए, लेकिन किसी भी जांबाज ने मोर्चा नहीं छोड़ा। प्रमुख समाचार एजेंसी पीटीआई को दी बाइट में चश्मदीद पूरन ने बताया कि गोलियों को बौछारों और विस्फोटों का सिलसिला करीब 06 बजे तक चला। लहूलुहान होने के बाद भी जब हमारे जांबाजों ने मोर्चा नहीं छोड़ा तो आतंकवादियों ने जिस जंगल की आड़ लेकर हमला किया था, उसी में भाग खड़े होने को विवश हो गए। मरते दम तक भारत माता की खातिर डटे रहने वाले यही जांबाज जब तिरंगे में लिपटकर अपनी जन्मभूमि उत्तराखंड पहुंचे तो गम और गुस्से के माहौल उन्हें सलाम किया। शहीदों के पार्थिव शरीर मंगलवार शाम को विशेष विमान से जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर लाए गए तो वहां भावनाओं का ज्वार ही उमड़ पड़ा।

बलिदानियों के पार्थिव शरीर सेना के वाहन से उनके पैतृक आवास ले जाए गए। जहां पर बुधवार को सैन्य सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी। शहीद सैनिकों में नायब सूबेदार आनंद सिंह रावत रुद्रप्रयाग के कांडाखाल गांव के निवासी थे। उनकी पत्नी व बच्चे देहरादून के गुजरोंवाली में रहते हैं। बड़े भाई व मां गांव में ही रहते हैं। वह 06 महीने पहले ही छुट्टी काटकर अपनी यूनिट में गए थे। इसके अलावा हवलदार कमल सिंह पौड़ी जिले के लैंसडौन क्षेत्र के नोदानू गांव के निवासी थे। नायक विनोद सिंह भंडारी मूलरूप से टिहरी गढ़वाल के जाखणीधार क्षेत्र के अंतर्गत चौंड जसपुर गांव से थे। वर्तमान में उनका परिवार देहरादून के भानियावाला (अठूरवाला) में रहता है। वह 03 बहनों के इकलौते भाई थे। डेढ़ महीने पहले ही वह छुट्टी पूरी कर यूनिट में लौटे थे। वह अपने पीछे माता-पिता, पत्नी और एक बेटा व एक बेटी को छोड़ गए हैं।

इसके अलावा 26 वर्षीय राइफलमैन आदर्श नेगी भी टिहरी गढ़वाल के थाती डागर गांव के निवासी थे। 03 भाई-बहनों में आदर्श सबसे छोटे थे। उनके परिवार ने इसी वर्ष अप्रैल में मेजर बेटे प्रणय नेगी को भी खोया, जो लेह में देश सेवा करते हुए बलिदान हो गए। पौड़ी गढ़वाल के रिखणीखाल क्षेत्र के डोबरिया गांव निवासी राइफलमैन अनुज नेगी भी इस आतंकी हमले में शहीद हुए हैं। उनकी बीते साल नवंबर में ही शादी हुई थी। उत्तराखंड के सपूतों के इस बलिदान ने नागरिकों को झकझोर कर रख दिया है। गम इस बात का है कि हमारे जांबाज अब उनके बीच नहीं है और गुस्सा तभी शांत होगा ,जब इस कायराना हरकत के जिम्मेदार आतंकियों को उनके बनाए गए नर्क में भेज दिया जाएगा। जिसे वह जन्नत कहकर अपनी तरह नए आतंकियों को तैयार करते हैं। आतंकियों को उन्हीं के नर्क में भेजने के लिए सेना, पुलिस और केन्द्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स ने कठुआ, ऊधमपुर और डोडा समेत विभिन्न इलाकों में गहन सर्च अभियान शुरू कर दिया है।

पांच जवान घायल, मिलिट्री अस्पताल में चल रहा उपचार
कठुआ में हुए आतंकी हमले में 22वीं गढ़वाल राइफल्स के 05 जवान भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इनमें हवलदार सुजान राम, हवलदार अरविंद सिंह, सागर सिंह, गगनदीप सिंह व कार्तिक शामिल हैं। घायल जवानों का इलाज पठानकोट स्थित मिलिट्री अस्पताल में चल रहा है। घायल हवलदार सुजान राम मूल रूप से चमोली जिले के थराली विकासखंड के रतगांव के निवासी हैं। वर्तमान में उनका परिवार बरेली में रहता है, जबकि माता-पिता व 02 भाई गांव में ही हैं। देश-प्रदेश के लोग घायल जवानों के शीघ्र स्वस्थ्य होने की कामना कर रहे हैं।

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