Almora, 07 June2026। उत्तराखंड की वीरभूमि अल्मोड़ा ने देश सेवा में अपना एक और होनहार सपूत खो दिया। जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में आतंकवाद विरोधी संयुक्त सैन्य अभियान के दौरान 25 वर्षीय लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी शहीद हो गए। विडंबना यह रही कि महज दो दिन बाद उन्हें सेना में कैप्टन पद पर पदोन्नत किया जाना था, लेकिन उससे पहले ही उन्होंने मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दे दिया।
मूल रूप से सोमेश्वर क्षेत्र के बाड़ी बग्वालीपोखर और वर्तमान में पांडेखोला (अथरबनी) निवासी बीरेश्वर गोस्वामी पांच असम रेजिमेंट में तैनात थे। सेना के अनुसार राजौरी के गंभीर मुगला और डोरेमल के दुर्गम जंगलों में चल रहे आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान उनका संतुलन बिगड़ गया और वह गहरी खाई में गिर गए। गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्होंने अंतिम सांस ली।
लेफ्टिनेंट बीरेश्वर बचपन से ही प्रतिभाशाली और अनुशासित छात्र रहे। उन्होंने सैनिक स्कूल घोड़ाखाल से शिक्षा प्राप्त की और बाद में ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई के दौरान रजत पदक हासिल किया। इंग्लैंड के एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एनएलयू) में चयन होने के बावजूद उन्होंने देश सेवा का रास्ता चुना। वर्ष 2023 में सेना में शामिल हुए और जून 2024 में अधिकारी के रूप में कमीशन प्राप्त किया।
उनके पिता प्रमोद नाथ गोस्वामी भनोली तहसील में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी हैं, जबकि माता सरस्वती गोस्वामी शिक्षिका हैं। बेटे की शहादत की खबर मिलते ही परिवार सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
रविवार को सेना के जवानों द्वारा पार्थिव शरीर उनके आवास लाए जाने पर हजारों लोगों ने नम आंखों से अपने वीर सपूत को श्रद्धांजलि दी। बाद में विश्वनाथ श्मशान घाट पर पूरे सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उनके बड़े भाई अमित गोस्वामी ने मुखाग्नि दी।
अंतिम विदाई के दौरान केंद्रीय राज्यमंत्री अजय टम्टा, विधायक मनोज तिवारी, जिलाधिकारी अंशुल सिंह, एसएसपी चंद्रशेखर घोड़के सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और स्थानीय लोग मौजूद रहे। भारत माता के जयघोष और नम आंखों के बीच अल्मोड़ा ने अपने वीर बेटे को अंतिम सलामी दी।
कैप्टन बनने से दो दिन पहले देश पर न्योछावर हुआ अल्मोड़ा का जांबाज
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