Dehradun, 17 June 2026। दैनिक जागरण के समाचार संपादक देवेंद्र सती ने कहा कि सीखना और सिखाना जीवन की एक सतत प्रक्रिया है, जो कभी रुकनी नहीं चाहिए। निरंतर सीखने की प्रवृत्ति ही नए विचारों, नवाचार और रचनात्मकता को जन्म देती है तथा व्यक्ति के व्यक्तित्व को नई दिशा प्रदान करती है।
उन्होंने कहा कि जीवन के हर चरण में इंसान कुछ न कुछ सीखता रहता है। बचपन में वह उठना, बैठना और चलना सीखता है, फिर पढ़ना-लिखना और जीवन के विभिन्न कौशलों को आत्मसात करता है। समय के साथ व्यक्ति परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढालना और चुनौतियों का सामना करना भी सीखता है। यही निरंतर सीखने की प्रक्रिया उसे अधिक सक्षम और परिपक्व बनाती है।
देवेंद्र सती ने कहा कि सीखना केवल शिक्षा प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवनभर चलने वाली प्रक्रिया है। जो व्यक्ति नई चीजों को जानने और समझने के लिए हमेशा उत्सुक रहता है, वह बदलते समय के साथ स्वयं को बेहतर तरीके से विकसित कर पाता है। इसके विपरीत, जब सीखने की प्रक्रिया रुक जाती है तो व्यक्ति के जीवन में ठहराव आने लगता है। यही ठहराव धीरे-धीरे जड़ता का रूप ले लेता है, जो उसकी प्रगति और सफलता के मार्ग में बड़ी बाधा बन सकता है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में तेजी से बदलती तकनीक, नई कार्यशैलियां और सामाजिक परिस्थितियां लोगों के सामने लगातार नई चुनौतियां प्रस्तुत कर रही हैं। ऐसे में व्यक्तिगत और पेशेवर विकास के लिए स्वयं को लगातार अपडेट रखना आवश्यक है। सीखने की इच्छा और जिज्ञासा व्यक्ति को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है तथा उसे नई संभावनाओं के लिए तैयार करती है।
सती ने लोगों से आह्वान किया कि वे जीवनभर सीखने की आदत को अपने व्यक्तित्व का हिस्सा बनाएं। जिज्ञासु बने रहना, नए अनुभवों को अपनाना और हर परिस्थिति से कुछ नया सीखने का प्रयास करना ही सफलता, आत्मविकास और बेहतर भविष्य की सबसे मजबूत नींव है।
सीखना कभी न छोड़ें, यही सफलता और विकास की असली कुंजी: देवेंद्र सती
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