Dehradun, 27 july 2026। जलवायु परिवर्तन, अत्यधिक बारिश, भूकंप और पुराने होते बांधों से बढ़ती चुनौतियों के बीच देश की बांध सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। अब आईआईटी रुड़की बांध सुरक्षा के क्षेत्र में विशेष रूप से प्रशिक्षित विशेषज्ञ इंजीनियर तैयार करेगा। इसके लिए विभिन्न राज्यों के बांधों और जल संसाधन परियोजनाओं में कार्यरत इंजीनियरों को आईआईटी रुड़की और भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) बेंगलुरु के विशेष स्नातकोत्तर प्रशिक्षण कार्यक्रमों में नियमित रूप से शामिल किया जाएगा।
इस पहल का उद्देश्य ऐसे विशेषज्ञ तैयार करना है, जो आधुनिक तकनीक, जोखिम विश्लेषण और आपदा प्रबंधन के जरिए देशभर के बांधों की सुरक्षा को अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी बना सकें। जल शक्ति मंत्रालय ने बढ़ते जलवायु जोखिमों और पुराने बांधों की स्थिति को देखते हुए बांध सुरक्षा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ विशेषज्ञ मानव संसाधन विकसित करने पर विशेष जोर दिया है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत इंजीनियरों को बांधों की संरचनात्मक सुरक्षा, भूकंपीय जोखिम, आधुनिक निगरानी प्रणाली, जलाशय प्रबंधन, आपातकालीन कार्य योजना, जोखिम मूल्यांकन तथा संचालन एवं रखरखाव जैसे महत्वपूर्ण विषयों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे वे आपात स्थितियों में त्वरित और बेहतर तकनीकी निर्णय लेने में सक्षम हो सकेंगे।
इसके साथ ही महत्वपूर्ण बांधों की निगरानी के लिए नए तकनीकी दिशा-निर्देश तैयार किए जाएंगे। बांधों के डिजाइन, निर्माण, गुणवत्ता नियंत्रण और निरीक्षण से जुड़ी एजेंसियों की मान्यता प्रणाली को मजबूत करने, बांध विफलता की वैज्ञानिक रिपोर्टिंग का ढांचा विकसित करने, विशेषज्ञों का पैनल बनाने और जोखिम आधारित सुरक्षा प्रणाली लागू करने पर भी काम किया जाएगा। जलाशयों में बढ़ती गाद की समस्या के समाधान के लिए भी नए प्रावधान तैयार किए जा रहे हैं।
आईआईटी रुड़की के नेतृत्व में तैयार होने वाले प्रशिक्षित इंजीनियर देश की बांध सुरक्षा व्यवस्था को विश्वस्तरीय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसका सीधा लाभ उत्तराखंड समेत उन राज्यों को मिलेगा, जहां बड़े बांध पेयजल, सिंचाई और बिजली उत्पादन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा क्षमता निर्माण के लिए सूरत, कालीकट, नागपुर, गुवाहाटी और शिलांग के चुनिंदा राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (एनआईटी) को भी इस प्रशिक्षण व्यवस्था से जोड़ने पर विचार किया जा रहा है।
अब बांधों की सुरक्षा करेंगे हाईटेक विशेषज्ञ, आईआईटी रुड़की तैयार करेगा नई पीढ़ी के इंजीनियर
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