Dehradun, 27 july 2026। उत्तराखंड ने कृषि निर्यात के क्षेत्र में नई पहचान बनाते हुए पहली बार फ्रोजन फ्रेंच फ्राइज का निर्यात किया है। उधमसिंह नगर जिले के काशीपुर से 24 मीट्रिक टन फ्रोजन फ्रेंच फ्राइज की पहली खेप इराक भेजी गई है। इस उपलब्धि के साथ उत्तराखंड अब मूल्यवर्धित कृषि उत्पादों के वैश्विक बाजार में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराने वाले राज्यों में शामिल हो गया है। इस निर्यात को किसानों की आय बढ़ाने, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को मजबूती देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
यह खेप वीरुन ग्लोबल ट्रेड प्राइवेट लिमिटेड ने भारत सरकार के कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के सहयोग से निर्यात की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राज्य में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग का विस्तार होता है तो किसानों को पारंपरिक खेती की तुलना में बेहतर कीमत मिलेगी और कृषि को वैश्विक बाजार से जोड़ने का रास्ता भी मजबूत होगा।
फ्रोजन फ्रेंच फ्राइज सामान्य आलू नहीं, बल्कि एक मूल्यवर्धित उत्पाद है। इसमें विशेष गुणवत्ता वाले आलू को धोने, छीलने, काटने और आधुनिक तकनीक से प्रसंस्कृत करने के बाद बेहद कम तापमान पर संरक्षित किया जाता है। होटल, रेस्तरां और फास्ट फूड श्रृंखलाओं में इसकी मांग अधिक रहती है, इसलिए इसकी बाजार कीमत भी सामान्य आलू से ज्यादा होती है। इससे किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले आलू की खेती के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
इस निर्यात से केवल किसानों को ही नहीं, बल्कि कोल्ड स्टोरेज, पैकेजिंग, परिवहन और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों में भी रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। पूरी कृषि मूल्य श्रृंखला को इसका लाभ मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी।
निर्यातक कंपनी ने उम्मीद जताई है कि उत्पाद की गुणवत्ता के आधार पर इराक के अलावा अन्य देशों से भी जल्द नए ऑर्डर मिल सकते हैं। एपीडा ने कंपनी को सियाल, गल्फूड, इंडसफूड और वर्ल्ड फूड इंडिया जैसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में भागीदारी के लिए भी सहयोग दिया है, जिससे विदेशी खरीदारों तक पहुंच आसान हुई है।
एपीडा के अध्यक्ष अभिषेक देव ने कहा कि उत्तराखंड जैसे स्थल-आवेष्ठित राज्यों के लिए परिवहन लागत सबसे बड़ी चुनौती है। इसे देखते हुए उत्तराखंड सरकार के साथ कृषि निर्यात नीति और परिवहन सहायता जैसे उपायों पर काम किया जा रहा है। उनका कहना है कि इससे राज्य के कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने और निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी।




