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Himalaya Ki Awaj > Blog > उत्तराखंड > अब AI करेगा हाथियों की हिफाजत, ट्रैक पर आते ही लोको पायलट को मिलेगा अलर्ट
उत्तराखंड

अब AI करेगा हाथियों की हिफाजत, ट्रैक पर आते ही लोको पायलट को मिलेगा अलर्ट

Web Editor
Last updated: 2026/08/03 at 5:22 PM
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3 Min Read
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Dehradun, 04 August 2026। राजाजी नेशनल पार्क से गुजरने वाले रेलवे ट्रैक पर अब हाथियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) संभालेगा। उत्तराखंड में पहली बार एआई आधारित इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम (IDS) स्थापित किया जा रहा है, जो कांसरों से हरिद्वार के बीच 22 किलोमीटर लंबे रेलवे ट्रैक पर वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखेगा। जैसे ही कोई हाथी या अन्य बड़ा वन्यजीव ट्रैक के करीब पहुंचेगा, कुछ ही सेकंड में लोको पायलट के टैबलेट पर अलर्ट पहुंच जाएगा, जिससे समय रहते ट्रेन की गति नियंत्रित कर हादसे को टाला जा सकेगा।

राजाजी टाइगर रिजर्व से गुजरने वाला यह रेलवे ट्रैक लंबे समय से वन्यजीवों के लिए सबसे संवेदनशील माना जाता है। साल 2010 से अब तक इस ट्रैक पर ट्रेन की चपेट में आने से आठ हाथियों की मौत हो चुकी है। इन्हीं हादसों को रोकने के लिए रेलवे और वन विभाग ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है। यह तकनीक फिलहाल असम में उपयोग की जा रही है, जबकि पश्चिम बंगाल में इसे लागू करने की प्रक्रिया चल रही है। उत्तराखंड इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाने वाला राज्य बन गया है।

कैसे करेगा काम इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम

रेलवे ट्रैक के समानांतर करीब एक मीटर गहराई में ऑप्टिकल फाइबर (ओएफसी) केबल बिछाई गई है, जिसके साथ एआई आधारित सेंसर लगाए गए हैं। ट्रैक के दोनों ओर लगभग 100 मीटर के दायरे में किसी बड़े वन्यजीव की गतिविधि से जमीन में पैदा होने वाली कंपन को सेंसर तुरंत पकड़ लेते हैं। एआई इन संकेतों का विश्लेषण कर लोको पायलट के टैबलेट पर तत्काल चेतावनी भेज देता है। विशेष बात यह है कि ओएफसी केबल बिछाने के दौरान किसी भी पेड़ को नुकसान नहीं पहुंचाया गया।

मोतीचूर में सफल रहा ट्रायल

राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. कोको रोसे ने बताया कि इस तकनीक का पिछले वर्ष मोतीचूर क्षेत्र में सफल ट्रायल किया जा चुका है। अब इसे राज्य वन्यजीव बोर्ड की बैठक में रखा जाएगा। यदि परिणाम संतोषजनक रहे तो इसे राज्य के अन्य संवेदनशील रेलवे ट्रैक पर भी लागू किया जाएगा।

पहले से तय है ट्रेनों की गति सीमा

वन्यजीवों की सुरक्षा को देखते हुए देहरादून-हरिद्वार रेलखंड पर पहले से ही ट्रेनों की गति सीमा निर्धारित है। दिन में अधिकतम 40 किलोमीटर प्रति घंटा और रात में 35 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से ही ट्रेनों का संचालन किया जाता है। अब एआई आधारित निगरानी जुड़ने से हाथियों और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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