KEDARNATH, 06 SEPTEMBER 2026 । केदारनाथ यात्रा मार्ग पर अब जंगलों में आग का कारण बनने वाला पिरुल और खच्चरों की लीद बेकार नहीं जाएगी। दोनों अपशिष्ट को मिलाकर तैयार किया गया बायोमास फ्यूल अब पैदल मार्ग के ढाबों में खाना पकाने के काम आएगा। केदारनाथ धाम में इसका शुरुआती ट्रायल सफल रहा है और करीब सात टन बायोमास पेलेट्स तैयार किए गए हैं।
परियोजना के तहत यात्रा मार्ग से करीब 20 टन खच्चर लीद और 250 क्विंटल पिरुल एकत्र किया गया। दोनों को निर्धारित अनुपात में मिलाकर मशीन के माध्यम से पेलेट्स तैयार किए गए। इनका उपयोग विशेष बायोमास फ्यूल स्टोव में किया जा रहा है। फिलहाल ढाबों के लिए करीब 20 ऐसे स्टोव उपलब्ध कराए गए हैं।
परियोजना का उद्देश्य एक साथ कई पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान करना है। गर्मियों में सूखा पिरुल जंगलों में आग तेजी से फैलने का माध्यम बनता है। वहीं केदारनाथ यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में खच्चरों से निकलने वाला जैविक अपशिष्ट भी प्रबंधन की चुनौती रहता है। दोनों को ईंधन में बदलकर कचरे के निस्तारण के साथ वैकल्पिक ऊर्जा का स्रोत तैयार किया जा रहा है।
अब परियोजना का विस्तार करने की तैयारी है। अधिकारियों के अनुसार संयंत्र की क्षमता बढ़ाकर प्रतिदिन करीब एक टन पेलेट्स तैयार करने का लक्ष्य है। भविष्य में इनका इस्तेमाल बॉयलर और गीजर चलाने में भी किया जाएगा, जिससे यात्रियों को गर्म पानी उपलब्ध कराने के लिए पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता घटाई जा सके।
हिमालयन इंस्टीट्यूट फॉर एनवायरनमेंट, इकोलॉजी एंड डेवलपमेंट के निदेशक उदित घिल्डियाल की संस्था भी परियोजना में सहयोग कर रही है। उनके अनुसार कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद शुरुआती प्रयोग सफल रहा है।
बाक्स : स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार
पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल ने कहा कि पिरुल और खच्चरों के अपशिष्ट से तैयार फ्यूल पर्यावरण अनुकूल होने के साथ लागत प्रभावी भी है। योजना में स्थानीय लोगों और स्वयं सहायता समूहों को पिरुल संग्रह से जोड़ने का प्रस्ताव है। इससे जंगलों से पिरुल हटेगा और ग्रामीणों को अतिरिक्त आय का जरिया भी मिल सकेगा।




