Dehradun, 06 October 2026। कांग्रेस में चल रही अंदरूनी खींचतान के बीच पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पार्टी नेतृत्व पर एक बार फिर निशाना साधा है। कांग्रेस की आपत्ति के बावजूद जसपुर से हल्द्वानी तक धन्यवाद यात्रा पर निकले रावत ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पार्टी की मौजूदा राजनीति पर सवाल खड़े किए।
रावत ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि वर्ष 2016 में कांग्रेस को तोड़ने में ‘इंस्ट्रूमेंट’ बने व्यक्ति आज पार्टी में महिमामंडित हो रहे हैं और उन्हें हीरो के तौर पर देखा जा रहा है। इसके विपरीत, उस दौर में कांग्रेस की सरकार बचाने के लिए संघर्ष करने वाले नेताओं को विलेन की नजर से देखा जा रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस व्यक्ति की भूमिका उनकी सरकार को गिराने के प्रयास में रही, उसे आज धन-संपत्ति के आधार पर सम्मान मिल रहा है। वहीं, पार्टी और सरकार को बचाने के लिए अपना सब कुछ लगाने वालों के योगदान को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस की राजनीतिक स्मृति और विचारधारा अब बदल रही है।
रावत ने अपने बयान के जरिए पार्टी नेतृत्व को यह संदेश देने की कोशिश की कि संकट के समय कांग्रेस के साथ खड़े रहे नेताओं और कार्यकर्ताओं के योगदान को भी सम्मान मिलना चाहिए।
दरअसल, वर्ष 2016 में कांग्रेस के नौ विधायक बागी हो गए थे। इन विधायकों के भाजपा के साथ जाने से तत्कालीन हरीश रावत सरकार संकट में आ गई थी। इसके बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा था। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुए फ्लोर टेस्ट में रावत सरकार ने बहुमत साबित कर सत्ता में वापसी की थी।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में नेतृत्व, संगठन और चुनावी रणनीति को लेकर खींचतान के बीच रावत का यह बयान पार्टी के भीतर चल रही बहस को और तेज करने वाला माना जा रहा है।




