Dehradun, 04 August2026। भविष्य में दवाओं का निर्माण पहले से अधिक सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल हो सकता है। आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों ने ऐसी नई तकनीक विकसित की है, जिससे नवीकरणीय (रिन्यूएबल) अल्कोहल को उच्च-मूल्य वाले कार्बनिक रसायनों में बदला जा सकेगा। यह तकनीक दवा उद्योग के साथ-साथ रसायन और उन्नत सामग्री निर्माण में लागत घटाने और उत्पादन प्रक्रिया को अधिक स्वच्छ बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
आईआईटी रुड़की का यह शोध दुनिया की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित हुआ है। वैज्ञानिकों ने इस तकनीक में महंगी धातुओं के बजाय आसानी से उपलब्ध निकेल का उत्प्रेरक (कैटेलिस्ट) के रूप में उपयोग किया है। इससे उत्पादन की लागत कम होने के साथ पर्यावरण पर पड़ने वाला असर भी घटेगा।
इस शोध का नेतृत्व रसायन विज्ञान विभाग के प्रो. देबाशीष बनर्जी ने किया। उन्होंने बताया कि उनकी टीम ने ऐसी प्रक्रिया विकसित की है, जो जैव-आधारित अल्कोहलों को औद्योगिक उपयोग के महत्वपूर्ण कार्बनिक यौगिकों में बदल सकती है। इन रसायनों का उपयोग दवाओं, विशेष रसायनों और आधुनिक सामग्रियों के निर्माण में होता है।
वैज्ञानिकों ने इस तकनीक से 27 महत्वपूर्ण कार्बनिक यौगिक और 23 अन्य उच्च-चयनात्मक रसायनों का सफल निर्माण किया। इसके अलावा विटामिन-ई, डीएल-गैलेक्टोज़ और टैमोक्सीफेन जैसे महत्वपूर्ण यौगिकों से मिलते-जुलते पदार्थ भी तैयार किए गए। इससे साबित हुआ कि यह तकनीक भविष्य में दवा निर्माण के लिए काफी उपयोगी हो सकती है।
आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. केके पंत ने कहा कि यह उपलब्धि हरित रसायन और टिकाऊ तकनीकों के क्षेत्र में बड़ा कदम है। इससे कम लागत में दवाओं और अन्य उपयोगी रसायनों का निर्माण संभव होगा, साथ ही पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
दवा बनाना होगा सस्ता, IIT रुड़की की नई तकनीक से हरित रसायन को मिलेगी नई रफ्तार
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