चालीस प्रकार के पुष्पों का किया गया उपयोग
धाम में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, आज खुलेंगे कपाट
केदारनाथ, 21 April 2026 । भव्य, दिव्य और अलौकिक आभा से दैदीप्यमान केदारनाथ। परिसर से मंदिर को निहारते हुए कुछ इसी तरह का अहसास करा रहा है बाबा का यह पावन स्थान। हिमालय की गोद में बर्फ से ढकी चोटियों के बीच ऐसा लग रहा है मानो इस विशेष अवसर का साक्षी बनने के लिए देवों का भी आगमन होने वाला हो। धाम को इस बार 51 कुंतल फूलों से सुसज्जित किया गया है। जिनकी सुगंध और रंगों की छटा पूरे परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर रही है। चालीस प्रकार के फूलों से सजे मंदिर में मात्र गेंदे के फूलों का वजन ही 35 कुंतल है।
बाबा केदार की यात्रा शुरू होने से दस दिन पहले ही ये तैयारियां होने लगीं थीं। धाम को सजाने का जिम्मा संभाला ऋषिकेश की पुष्प सेवा समिति। समिति लंबे समय से यह कार्य कर रही है। दुर्गम पहाड़ी मार्गों को पार करते हुए 75 खच्चरों के जरिए इन फूलों को धाम तक पहुंचाया गया। मंदिर के द्वार, गर्भगृह के आसपास का क्षेत्र और पूरा परिसर फूलों की श्रृंखला से इस तरह सजा है कि हर ओर एक अलौकिक शांति और दिव्यता का अनुभव हो रहा है। समिति के कारीगरों ने न केवल फूलों को सजाया, बल्कि एक-एक पंखुड़ी में आस्था का भाव भी पिरोया है। सजावट इस प्रकार की गई है कि मंदिर की प्राचीनता, शिव की महिमा और हिमालय की पवित्रता एक साथ झलकती है।
मेष लग्न में होगा कपाटोद्धाटन
ब्रह्म मुहूर्त से ही कपाट उद्घाटन की पावन प्रक्रिया प्रारंभ होगी। वैदिक मंत्रों की गूंज, धूप-दीप की सुगंध और घंटों की अनुगूंज के बीच बुधवार प्रात: 08:00 बजे मेष लग्न में बाबा केदार के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुलेंगे। यह क्षण न केवल एक धार्मिक परंपरा है, बल्कि आस्था, श्रद्धा और दिव्यता का संगम भी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी धाम में उपस्थित रहकर इस पल के साक्षी बनेंगे।
हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजा धाम
बाबा केदार की पंचमुखी डोली उखीमठ से प्रस्थान कर जब धाम पहुंची, तो पूरा वातावरण “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा। भक्तों की आंखों में आस्था और हृदय में भक्ति का सागर उमड़ पड़ा। प्रशासन और मंदिर समिति ने भी श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सभी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे दिया है। चारों ओर आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला, जिससे केदारनाथ में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो गया है।




