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Himalaya Ki Awaj > Blog > उत्तराखंड > कमजोर मानसून के संकेत, सामान्य से कम बारिश की आशंका
उत्तराखंड

कमजोर मानसून के संकेत, सामान्य से कम बारिश की आशंका

Web Editor
Last updated: 2026/04/25 at 5:39 PM
Web Editor
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3 Min Read
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देहरादून, 25 April 2026। देश में इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून को लेकर जारी शुरुआती पूर्वानुमान ने चिंता बढ़ा दी है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार 2026 में मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है, जिससे कृषि, जल संसाधनों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर पड़ने की आशंका है।
मौसम विभाग के आकलन के मुताबिक जून से सितंबर के बीच देश में कुल वर्षा दीर्घकालिक औसत (एलपीए) का करीब 92 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जिसमें कुछ हद तक परिवर्तन संभव है। विश्लेषण बताता है कि इस बार सामान्य से कम वर्षा की संभावना ज्यादा है, जबकि सामान्य या उससे अधिक बारिश के आसार अपेक्षाकृत कम हैं।
पूर्वानुमान के अनुसार देश के अधिकांश हिस्सों में कमजोर मानसून का प्रभाव देखने को मिल सकता है। हालांकि कुछ क्षेत्रों—जैसे पूर्वोत्तर, उत्तर-पश्चिम और दक्षिणी प्रायद्वीपीय इलाकों—में सामान्य या बेहतर वर्षा हो सकती है, लेकिन कुल मिलाकर बड़े भूभाग में बारिश की कमी की आशंका बनी हुई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति बनी रहती है तो खरीफ फसलों पर सीधा असर पड़ेगा। धान, दालें और तिलहन जैसी फसलें वर्षा पर निर्भर होती हैं, ऐसे में उत्पादन घट सकता है और खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना भी बढ़ सकती है। साथ ही जलाशयों में पानी का स्तर गिरने, भूजल में कमी और पेयजल संकट गहराने की आशंका भी जताई गई है।
महासागरीय परिस्थितियां भी इस बार मानसून को प्रभावित कर रही हैं। प्रशांत महासागर में बदलते पैटर्न और मानसून के दौरान एल नीनो के विकसित होने के संकेत मिल रहे हैं, जो आमतौर पर कम वर्षा से जुड़ा होता है। वहीं हिंद महासागर में तटस्थ स्थिति बनी हुई है, जो आगे चलकर बदल सकती है। आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा के अनुसार इन कारकों पर लगातार नजर रखी जा रही है, क्योंकि इनका सीधा प्रभाव मानसून की तीव्रता पर पड़ता है।
मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह पहला चरण का पूर्वानुमान है और मई के अंत में दूसरा अपडेट जारी किया जाएगा। इसके बाद जून से अगस्त तक के मासिक पूर्वानुमान भी क्रमशः सामने आएंगे।

 

क्या है ला नीना और एल नीनो?
एल नीनो और ला नीना प्रशांत महासागर में होने वाली जलवायु प्रक्रियाएं हैं, जो वैश्विक मौसम और खासकर भारत के मानसून को प्रभावित करती हैं।
एल नीनो: जब महासागर का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है, तो यह स्थिति बनती है। इससे भारत में मानसून कमजोर पड़ने और कम बारिश होने की संभावना बढ़ जाती है।
ला नीना: इसके विपरीत, जब समुद्र का पानी सामान्य से ठंडा होता है, तो इसे ला नीना कहा जाता है। यह स्थिति आमतौर पर भारत में अच्छे मानसून और अधिक वर्षा से जुड़ी होती है।
इन दोनों प्रक्रियाओं का असर कृषि, जल संसाधन और मौसम के पैटर्न पर व्यापक रूप से पड़ता है।

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Web Editor April 25, 2026
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