Dehradun, 19 June 2026। मशहूर देहरादूनी लीची अब यूरोप के बाजारों में भी अपनी मिठास घोलने जा रही है। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के सहयोग से देहरादून से इटली के लिए पहली बार ताजी लीची की खेप रवाना की गई है। यह कदम न केवल राज्य के बागवानी क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि है, बल्कि स्थानीय किसानों के लिए भी नए अवसरों के द्वार खोलने वाला साबित हो सकता है।
अपनी अनूठी मिठास, मनमोहक सुगंध और बेहतरीन गुणवत्ता के लिए देशभर में पहचान रखने वाली देहरादून की लीची अब यूरोप के लोगों का स्वाद भी मीठा करेगी। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के सहयोग से 18 जून को देहरादून से इटली के लिए एक मीट्रिक टन ताजी लीची की पहली निर्यात खेप रवाना की गई। इसके साथ ही उत्तराखंड की प्रीमियम लीची ने यूरोपीय बाजार में औपचारिक दस्तक दे दी है।
यह उपलब्धि उत्तराखंड के बागवानी क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। देहरादून की लीची अपने आकर्षक लाल रंग, सोंधी खुशबू और रसदार गूदे के लिए प्रसिद्ध है। विशेष रूप से रोज़ सेंटेड, कलकत्तिया और बेदाना जैसी किस्में देश-विदेश के बाजारों में काफी पसंद की जाती हैं। देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर की अनुकूल जलवायु इस फल को विशेष गुणवत्ता प्रदान करती है।
इटली को भेजी गई पहली खेप ने यह संकेत दिया है कि उत्तराखंड के बागवानी उत्पाद अब वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना रहे हैं। इस निर्यात से किसानों को घरेलू बाजार की तुलना में लगभग 25 प्रतिशत अधिक मूल्य प्राप्त हुआ है, जिससे उनकी आय में बढ़ोतरी की उम्मीद है।
एपीडा, उत्तराखंड सरकार, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), निर्यातकों और लॉजिस्टिक्स भागीदारों के संयुक्त प्रयासों से यह सफलता संभव हो सकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोप में मिली यह शुरुआत भविष्य में उत्तराखंड की लीची के लिए नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों का रास्ता खोलेगी और प्रदेश के किसानों को वैश्विक स्तर पर बेहतर अवसर उपलब्ध कराएगी।




