चार माह में भी चिन्हित नहीं हो पाया एक गांव
स्वैच्छिक चकबंदी नीति पर भारी पड़ रही प्रशासनिक सुस्ती
11 पर्वतीय जिलों में पांच साल में 275 गांवों को चकबंदी से जोड़ने का लक्ष्य
Dehradun, 04 October 2026 । पहाड़ में खेती बचाने, बिखरी कृषि जोतों को एकीकृत करने और पलायन रोकने के उद्देश्य से लाई गई स्वैच्छिक चकबंदी प्रोत्साहन नीति शुरुआती चरण में ही प्रशासनिक सुस्ती की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। नीति अधिसूचित हुए करीब चार माह बीतने के बावजूद प्रदेश के 11 पर्वतीय जिलों में एक भी गांव चकबंदी के लिए चिह्नित नहीं हो पाया है। जिलों से गांवों की सूची शासन तक नहीं पहुंचने पर अब राजस्व विभाग जिलाधिकारियों को रिमाइंडर भेजने की तैयारी कर रहा है।
विडंबना यह है कि सरकार ने पांच साल में 275 गांवों को चकबंदी से जोड़ने का लक्ष्य तय किया है, लेकिन शुरुआत में ही प्रक्रिया अटक गई है। शासन ने प्रत्येक जिले से भूमि विवाद से मुक्त पांच-पांच गांवों की सूची मांगी थी। इसके आधार पर ग्रामीणों की सहमति लेकर चकबंदी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी थी। लेकिन चार माह बाद भी जिलों की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो सकी है।
सरकार की मंशा पहाड़ में बिखरी कृषि भूमि को एकीकृत कर खेती को व्यावहारिक और लाभकारी बनाना है। पहाड़ में अधिकांश किसानों की जमीन छोटे-छोटे टुकड़ों में अलग-अलग स्थानों पर फैली हुई है। ऐसे में जुताई, सिंचाई, बुवाई और फसल की देखरेख में अधिक श्रम और समय लगता है। चकबंदी के माध्यम से किसानों को व्यवस्थित कृषि क्षेत्र उपलब्ध कराने की योजना है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर गांवों का चयन ही नहीं हो पाना नीति के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर रहा है।
जिलों को दोबारा रिमाइंडर भेजने की तैयारी
राजस्व विभाग अब जिलों को दोबारा निर्देश भेजने की तैयारी में है। राजस्व सचिव डा. एसएन पांडेय ने बताया कि जिलाधिकारियों को रिमाइंडर भेजकर गांवों के चयन में तेजी लाने के निर्देश दिए जा रहे हैं। गांवों के चयन के बाद भूमिधरों की आपसी सहमति के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
हर साल 55 गांवों में चकबंदी का लक्ष्य
11 पर्वतीय जिलों में पांच वर्षों के भीतर 275 गांवों को चकबंदी से जोड़ने का लक्ष्य है। इस हिसाब से हर साल औसतन 55 गांवों में प्रक्रिया आगे बढ़नी चाहिए। लेकिन पहले चरण में ही गांवों की सूची तैयार नहीं होने से लक्ष्य की समयबद्ध प्राप्ति पर प्रश्नचिह्न लगने लगा है।
नीति के तहत संबंधित क्षेत्र में न्यूनतम 10 हेक्टेयर भूमि होना आवश्यक है। इससे कम क्षेत्रफल होने पर कम से कम 25 खाताधारकों की लिखित सहमति जरूरी होगी। आवेदन बंदोबस्त अधिकारी (चकबंदी) अथवा सहायक कलेक्टर/परगनाधिकारी के समक्ष किया जा सकता है। चकबंदी पूरी तरह भूमिधरों की आपसी सहमति पर आधारित होगी और भूमि विवाद से मुक्त गांवों को प्राथमिकता दी जाएगी।
खेती और पलायन रोकने की उम्मीद
सरकार को उम्मीद है कि चकबंदी से कृषि और बागवानी गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। अनुपयोगी और बंजर होती भूमि को फिर खेती से जोड़ने के साथ ग्रामीणों की आजीविका के अवसर भी बढ़ेंगे। इससे पलायन रोकने के प्रयासों को गति मिलने की संभावना है।
हालांकि, नीति के शुरुआती चरण में ही गांवों का चयन नहीं हो पाना इस महत्वाकांक्षी योजना की जमीनी तैयारियों को उजागर करता है। सवाल यह है कि जब चार माह में एक गांव चिह्नित नहीं हो पाया, तो पांच साल में 275 गांवों का लक्ष्य कैसे पूरा होगा? क्या प्रशासनिक मशीनरी रिमाइंडर से आगे बढ़कर समयबद्ध कार्रवाई भी कर पाएगी?




