Dehradun, 07 October 2026। उत्तराखंड में भूकम्प के प्रति आमजन को जागरूक करने और भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली को हर समय सक्रिय रखने के लिए नई पहल शुरू की गई है। अब हर माह की नौ तारीख को पूर्वाह्न 11 बजे प्रदेश में भूकम्प चेतावनी सायरन बजाया जाएगा। यह वास्तविक भूकम्प की चेतावनी नहीं होगी, बल्कि सिस्टम की नियमित जांच और लोगों को सायरन की आवाज से परिचित कराने के लिए परीक्षण किया जाएगा।
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने आपदा प्रबंधन विभाग को इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का बड़ा हिस्सा भूकम्पीय दृष्टि से संवेदनशील जोन चार और पांच में आता है। ऐसे में समय रहते चेतावनी और लोगों की तैयारी बेहद महत्वपूर्ण है। नियमित परीक्षण से सायरन और सेंसर में आने वाली तकनीकी खामियों का समय रहते पता लगाया जा सकेगा।
06 अक्टूबर के भूकम्प में मिला था अलर्ट
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन के अनुसार, छह अक्टूबर की रात चमोली के थराली के निकट आए 4.9 तीव्रता के भूकम्प के दौरान भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली ने काम किया। आईआईटी रुड़की के सहयोग से संचालित प्रणाली के माध्यम से भूकंपीय तरंगों के पहुंचने से पहले चेतावनी मिली। भूदेव मोबाइल ऐप और सायरन के जरिए लोगों को अलर्ट किया गया।
169 सेंसर और 112 सायरन
वर्तमान में राज्य में भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली के तहत 169 सेंसर और 112 सायरन स्थापित हैं। यूएसडीएमए और आईआईटी रुड़की के सहयोग से अतिरिक्त सेंसर लगाने का प्रस्ताव भी चल रहा है।
हर माह होने वाले परीक्षण से लोगों को यह समझने में मदद मिलेगी कि वास्तविक भूकम्प के दौरान चेतावनी सायरन कैसा सुनाई देता है। परीक्षण के समय भूदेव ऐप पर भी संदेश, कंपन और बीप-बीप की ध्वनि के जरिए अलर्ट मिलेगा। विभाग ने लोगों से भूदेव और सचेत ऐप का अपडेटेड संस्करण रखने तथा लोकेशन की अनुमति देने की अपील की है।




