Dehradun, 19 July 2026। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के अधिकांश निर्माण कार्य पूरे होने के बाद उत्तराखंड सरकार अब रेलवे फ्रीज जोन में लागू प्रतिबंधों की समीक्षा की तैयारी में जुट गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर आवास एवं शहरी विकास विभाग ने इस प्रक्रिया की शुरुआत कर दी है। सरकार उन क्षेत्रों में राहत देने पर विचार कर रही है, जहां रेलवे निर्माण लगभग पूरा हो चुका है और सुरक्षा मानकों के अनुरूप विकास गतिविधियों की अनुमति दी जा सकती है।
वर्तमान में रेलवे कॉरिडोर के आसपास 400 मीटर तक का क्षेत्र फ्रीज जोन घोषित है। यदि समीक्षा के बाद तकनीकी परीक्षण अनुकूल रहता है तो इन क्षेत्रों में पर्यटन, आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं को चरणबद्ध तरीके से अनुमति मिलने का रास्ता खुल सकता है। इससे लंबे समय से रुके विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।
दरअसल, राज्य सरकार ने 9 जनवरी 2024 को रेल परियोजना के निर्माण के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए योगनगरी ऋषिकेश, शिवपुरी, व्यासी, सिराला, तिलवाड़ मल्ला, मलेथा, श्रीनगर, धारीदेवी, तिलनी, घोलतीर और गौचर सहित कई क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों पर रोक लगाई थी। इसका उद्देश्य सुरंगों और रेलवे ढांचे को किसी भी संभावित खतरे से सुरक्षित रखना था।
हालांकि इन प्रतिबंधों के कारण होटल, होमस्टे, रिसॉर्ट, आवासीय भवन और अन्य व्यावसायिक परियोजनाओं का विकास भी प्रभावित हुआ। स्थानीय नागरिकों, निवेशकों और पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों की ओर से लंबे समय से फ्रीज जोन की समीक्षा की मांग उठाई जा रही थी।
सरकार का मानना है कि सुरक्षा से समझौता किए बिना जहां संभव होगा, वहां विकास गतिविधियों को अनुमति देकर स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति दी जा सकती है। इससे पर्यटन, निवेश और रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होने की संभावना है।
बॉक्स : जिलाधिकारी तैयार करेंगे विस्तृत रिपोर्ट
आवास एवं शहरी विकास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने संबंधित जिलाधिकारियों और विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे ऐसे क्षेत्रों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करें, जहां रेलवे परियोजना का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। रिपोर्ट के आधार पर चरणबद्ध तरीके से प्रतिबंधों में राहत देने पर निर्णय लिया जाएगा।
बॉक्स : सुरक्षा से समझौता नहीं होगा
डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर फ्रीज जोन का तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर आकलन किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रेलवे सुरक्षा और तकनीकी मानकों से किसी प्रकार का समझौता नहीं होगा। सरकार का प्रयास जनहित और परियोजना हित के बीच संतुलन बनाते हुए स्थानीय लोगों, उद्यमियों और निवेशकों को विकास के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।




