Dehradun, 01 august 2026। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के नवप्रशिक्षित अधिकारियों से कहा कि एक लोकसेवक की सबसे बड़ी ताकत उसका चरित्र, नैतिकता और नेतृत्व क्षमता होती है। उन्होंने अधिकारियों का आह्वान किया कि वे केवल प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाने तक सीमित न रहें, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाले संवेदनशील नेतृत्वकर्ता बनें।
वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (आईजीएनएफए) में 2024 बैच के भारतीय वन सेवा परिवीक्षार्थियों के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि समय का सदुपयोग, सीमित संसाधनों में बेहतर परिणाम देने की क्षमता और उच्च नैतिक मूल्य ही किसी अधिकारी की वास्तविक पहचान हैं। उन्होंने कहा कि लोकसेवा में ईमानदारी, जवाबदेही और जनसेवा का भाव सर्वोच्च होना चाहिए।
भूपेंद्र यादव ने कहा कि नेतृत्व का अर्थ केवल प्रशासन चलाना नहीं, बल्कि त्याग, करुणा और दूसरों को प्रेरित करने की क्षमता विकसित करना भी है। एक अधिकारी को अपने निर्णयों से समाज का विश्वास जीतना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से आत्ममूल्यांकन और निरंतर सीखते रहने की आदत विकसित करने का भी आह्वान किया।
उन्होंने विश्वास जताया कि आज प्रशिक्षण पूरा कर रहे युवा अधिकारी वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगे। अपने संबोधन का समापन उन्होंने इस संदेश के साथ किया कि “एक अच्छा अधिकारी वही है, जो सबसे पहले एक अच्छा इंसान हो।”
111 अधिकारियों ने पूरा किया प्रशिक्षण
समारोह में 2024 बैच के 109 भारतीय वन सेवा परिवीक्षार्थियों और भूटान के दो अधिकारी प्रशिक्षुओं सहित कुल 111 अधिकारियों ने 20 माह का प्रशिक्षण पूरा किया। केंद्रीय मंत्री ने सभी सफल अधिकारियों को प्रमाणपत्र और पदक प्रदान किए।
राजस्थान की प्रतीक्षा नानासाहेब काले बनीं बैच टॉपर
राजस्थान संवर्ग की प्रतीक्षा नानासाहेब काले ने 2024 बैच में शीर्ष स्थान हासिल किया और उन्हें उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया।
समारोह में पर्यावरण मंत्रालय के सचिव तन्मय कुमार, वन महानिदेशक एवं विशेष सचिव सुशील कुमार अवस्थी, चेयरमैन-सीईसी सी.पी. गोयल, अपर वन महानिदेशक संतोष तिवारी और रमेश कुमार पाण्डेय, अपर सचिव अमनदीप गर्ग, आईसीएफआरई की महानिदेशक कंचन देवी, आईजीएनएफए के निदेशक डॉ. राजेंद्र प्रसाद खजूरिया, अपर निदेशक एन.सी. सरवणन, वन महानिरीक्षक डॉ. वी. क्लेमेंट बेन, भारतीय वन्यजीव संस्थान के निदेशक डॉ. जी.एस. भारद्वाज, एफआरआई के निदेशक सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी, प्रशिक्षु और उनके परिजन उपस्थित रहे।
पहले अच्छा इंसान बनें, फिर अच्छे अधिकारी’ : भूपेंद्र यादव
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