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Himalaya Ki Awaj > Blog > Uncategorized > उत्तराखंड में 2 लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि परती
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उत्तराखंड में 2 लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि परती

Web Editor
Last updated: 2026/03/13 at 11:24 PM
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3 Min Read
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Over 2 Lakh Hectares of Agricultural Land Lying Fallow in Uttarakhand, Govt Data Reveals

गैरसैंण, 14 March 2026 । उत्तराखंड में कृषि को बढ़ावा देने के सरकारी दावों के बीच खेती योग्य जमीन के उपयोग को लेकर चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। विधानसभा में पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में सरकार ने स्वीकार किया है कि प्रदेश में लगभग 2.08 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि परती पड़ी है, यानी इस जमीन पर खेती नहीं की जा रही।
सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार राज्य में कुल 7.35 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि दर्ज है, लेकिन इनमें से केवल 5.27 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ही वास्तविक बुवाई हो रही है। इससे साफ है कि प्रदेश में खेती का दायरा लगातार सिमट रहा है। स्थिति यह है कि राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में कृषि क्षेत्र का योगदान एक प्रतिशत से भी कम रह गया है।
जिलों के अनुसार देखें तो पौड़ी गढ़वाल में सबसे अधिक करीब 55,320 हेक्टेयर कृषि भूमि परती पड़ी है। इसके अलावा अल्मोड़ा में 26,447 हेक्टेयर, देहरादून में 22,884 हेक्टेयर, टिहरी गढ़वाल में 22,701 हेक्टेयर और पिथौरागढ़ में 14,703 हेक्टेयर भूमि खेती से बाहर है। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि पहाड़ी जिलों में कृषि गतिविधियां लगातार घट रही हैं।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ों से पलायन, सिंचाई सुविधाओं की कमी, जंगली जानवरों का बढ़ता खतरा और खेती से घटती आय इसके प्रमुख कारण हैं। कृषि विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र कुकसाल के अनुसार यदि परती पड़ी भूमि को दोबारा खेती के दायरे में लाया जाए तो राज्य में कृषि उत्पादन बढ़ने के साथ किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। इसके लिए सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, आधुनिक तकनीक का उपयोग और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना जरूरी है।
विधानसभा में सामने आए इन आंकड़ों ने एक बार फिर राज्य में कृषि भूमि के घटते उपयोग और बढ़ती परती जमीन के मुद्दे को प्रमुखता से सामने ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते ठोस नीतिगत कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में प्रदेश में कृषि क्षेत्र और कमजोर हो सकता है।

जिलेवार परती कृषि भूमि (हेक्टेयर में):
चमोली–5,376 | देहरादून–22,884 | हरिद्वार–9,672 | पौड़ी गढ़वाल–55,320 | रुद्रप्रयाग–2,558 | टिहरी गढ़वाल–22,701 | उत्तरकाशी–4,600 | अल्मोड़ा–26,447 | बागेश्वर–5,024 | चंपावत–14,869 | नैनीताल–10,700 | पिथौरागढ़–14,703 | उधमसिंह नगर–13,231

 

25 वर्षों में दोगुनी हुई परती भूमि
राज्य गठन के समय उत्तराखंड में करीब 8.77 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि थी, जिसमें से 7.70 लाख हेक्टेयर में खेती की जा रही थी, जबकि करीब 1.07 लाख हेक्टेयर भूमि परती थी। वर्तमान में खेती का क्षेत्र घटने के साथ परती भूमि का रकबा बढ़कर 2.08 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो राज्य के कृषि तंत्र के लिए गंभीर चुनौती माना जा रहा है।

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TAGGED: and falling agricultural contribution to the state economy., migration, raising concerns over declining farming area, Uttarakhand government data shows over 2.08 lakh hectares of cultivable land is lying fallow
Web Editor March 13, 2026
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