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Himalaya Ki Awaj > Blog > देश-विदेश > उत्तराखंड समेत देश के सभी बांधों का होगा जोखिम मूल्यांकन
देश-विदेश

उत्तराखंड समेत देश के सभी बांधों का होगा जोखिम मूल्यांकन

Web Editor
Last updated: 2026/01/26 at 2:11 PM
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3 Min Read
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NCDS to Conduct Risk Assessment of All Dams, Strengthening Safety in Uttarakhand

देहरादून, 26 जनवरी 2026। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी और भूकंप संभावित राज्य के लिए बांधों की सुरक्षा हमेशा सबसे बड़ा सवाल रही है। इसी दिशा राष्ट्रीय बांध सुरक्षा समिति (एनसीडीएस) ने यह अहम निर्णय लिया गया कि अब देश में सभी बांधों को जोखिम मूल्यांकन कराया जाएगा। वैज्ञानिक आधार पर किए जाने वाले इस मूल्यांकन से प्रदेश में टिहरी, कोटेश्वर, श्रीनगर, रामगंगा और विष्णुगाड़ जैसे बड़े बांधों की सुरक्षा और मजबूत होगी।
एनसीडीएस बैठक में हुए मंथन की जानकारी देते हुए केंद्रीय जल आयोग एवं राष्ट्रीय बांध सुरक्षा समिति के अध्यक्ष अनुपम प्रसाद ने कहा कि बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 का सफल क्रियान्वयन तभी संभव है, जब सभी संबंधित विभाग और एजेंसियां मिलकर तकनीकी मजबूती और आपसी समन्वय के साथ काम करें। बांधों की सुरक्षा सीधे लोगों की जान-माल से जुड़ी हुई है। उन्होंने बताया कि बैठक में खास तौर पर दो नए जोखिम मूल्यांकन तंत्रों पर चर्चा हुई, एसक्यूआरए और क्यूआरए।
उत्तराखंड के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां भूस्खलन, भारी वर्षा और बादल फटने जैसी प्राकृतिक घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं। एसक्यूआरए से प्रारंभिक स्तर पर खतरे की पहचान होगी, जबकि क्यूआरए से गंभीर स्थिति वाले बांधों पर विशेष निगरानी रखी जा सकेगी। इससे किसी भी बड़ी दुर्घटना से पहले समय रहते जरूरी कदम उठाए जा सकेंगे।
अनुपम के अनुसार इस दौरान व्यापक बांध सुरक्षा मूल्यांकन को और अधिक व्यावहारिक बनाने पर भी जोर दिया गया। ताकि बांधों की जांच केवल कागजी प्रक्रिया न रहे, बल्कि मौके पर आधुनिक तकनीकी उपकरणों के माध्यम से की जाए। कहा कि जोखिम आधारित मूल्यांकन व्यवस्था अपनाने से बांधों की दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित होगी। इससे न केवल आपदाओं को रोका जा सकेगा, बल्कि जल सुरक्षा, बिजली उत्पादन और बाढ़ नियंत्रण जैसे राष्ट्रीय उद्देश्यों को भी मजबूती मिलेगी।

सेमी क्वांटिटेटिव रिस्क असेसमेंट (एसक्यूआरए)
यह एक तरह से बांध की प्रारंभिक जांच है, जिसमें यह देखा जाता है कि किसी बांध में खतरा कम, मध्यम या अधिक है। इसमें बांध की उम्र, उसकी मौजूदा हालत, भूकंप की आशंका, पानी का दबाव, संरचना की मजबूती और आसपास रहने वाली आबादी जैसे बिंदुओं को ध्यान में रखा जाता है।

बाक्स
क्वांटिटेटिव रिस्क असेसमेंट (क्यूआरए)
एक गहन और तकनीकी जांच है। इसमें आंकड़ों और गणनाओं के जरिए यह आकलन किया जाता है कि अगर किसी बांध को नुकसान पहुंचता है तो उससे कितना बड़ा खतरा पैदा होगा, कितनी आबादी प्रभावित हो सकती है और जान-माल का संभावित नुकसान कितना हो सकता है। यह व्यवस्था विशेष रूप से उच्च जोखिम वाले बांधों पर लागू की जाएगी।

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Web Editor January 26, 2026
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